Tuesday, February 17, 2026

Kumauni Khadi Holi PDF

हा ेली नम्बर- 1

अंगना झाड़ बड़ार राधिका, तेरे अंगना हरि आयेगें।
कच्चे गोबर से अंगना लिपाये, मोतियन चौक पुराये।। राधिका।।
गज मोतियन की चौक पुराये, ब्रह्मा वेद बनाय ।। राधिका।।
अक्षत चन्दन बेल की पाती, नारियल भेंट चढ़ाये।। राधिका।।
क ृष्ण जी आये बलदेव जी आये, लाल ध्वजा फहराये।। राधिका।।

समाप्त

हा ेली नम्बर-2
हरि धरे मुक ुट खेलें होली, सिर धरे मुक ुट खेलें होली।।
कितने बरष क े कृष्ण कन्हैया, कितने वरष राधा गोरी ।। हरी धरे।।
सात बरष क े कृष्ण कन्हैया , पांच बरष राधा गोरी ।। हरी धरे।।
काहे को पहने क ृष्ण कन्हैया, काहे को राधा गोरी ।। हरी धरे।।
मुक ुट को पहने क ृष्ण कन्हैया, चीर को पहने राधा गोरी ।। हरी धरे।।
काहिन के ये खम्ब बने हैं, काहिन लाग रहि ड़ोरी ।। हरी धरे।।
अगर चन्दन क े खम्ब बने हैं, रेशम लागि रही ड़ोरी ।। हरी धरे।।

समाप्त

होली नम्बर-3

ज ै-जै बोलो यशोदा नन्दन की, जै-ज ै बोलो यशोदा नन्दन की ।।
मोर मुक ुट पीताम्बर सोहे, खैर बिराज े चन्दन की ।। ज ै-जै ।।
मधुर मधुर स्वर बांस मुरलिया, बाजत है सुख कन्दन की ।। ज ै-जै ।।
जमुना क े निर तिर धेनु चुंगाये, हाथ लकडिया चन्दन की ।। ज ै-जै ।।
दुष्ट दलन क ंशासुर मारो, रक्षा करि सब सन्तन की ।। ज ै-जै ।।
बिन्द्रावन में रास रचावे, सहसर गोपी क ुन्जन की ।। जै-जै ।।
सादर शेष महेश विधाता, सुर नर मुनि क े बन्धन की ।। जै-जै ।।
ज ै-ज ै जय हम चरण लुभावें, सुख दायक दुख भंजन की ।। ज ै-जै ।।

समाप्त

हा ेली नम्बर-4
श्री राम लिये अवतार अवधपुर , बाजे नगारे देवन क े। टेक।
मुनि वशिष्ट से पंडित ग्यानी। रूचि-2 लगन धराय ।। अवधपुर।।

कौशल्या क ेकैई और सुमित्रा। तीनों दशरथ रानी ।। अवधपुर।।

जब भूपति ने यज्ञ रचो है। बर दीनु जगदीश ।। अवधपुर।।

राम, लक्ष्मण,भरत, शत्रुघ्न । जन्मे चारों भाई ।। अवधपुर।।

जब से चारों भये सयान े । विद्या पढ़ने जाय ।। अवधपुर।।

विद्या पढ़कर जब घर आये। सबको हरष बढ़ाय ।। अवधपुर।।

मातु कौशल्या आरती लाये। सखियां मंगल गाय ।। अवधपुर।।

बिप्र बुलाकर वेद पडत हैं। विप्र ने दान कराय ।। अवधपुर।।

समाप्त

होली नम्बर-5

मुरली मनोहर लाल प्रभो । तुम युग-2 में अवतार भये ।। टेक ।।

सतयुग में भये हरि चन्द्र राजा। मरघट चीर उतार ।। प्रभो।।

उस युग में सब सत्य बखाने। सत्यहि को अवतार ।। प्रभो।।

त्रेता युग में राम भये हैं। लंकापति को मार ।। प्रभो।।

अवधपुरी अवतार लियो है । जनकपुरी से ब्याह ।। प्रभो।।

द्वापर युग में क ृष्ण भये हैं। कंसासुर को मार ।। प्रभो।।

ब्रज मंडल में रास रचो है। दहि माखन को खाय ।। प्रभो।।

कलयुग में निष्कलंकी भये हैं। बौद्ध भये अवतार ।। प्रभो।।

इस युग में सब झूठ बखाने। बोतल पीक े मार ।। प्रभो।।
समाप्त

हा ेली नम्बर- 6

द्रोपदी विपत में टेरत है। तुम काटो दुख अदुराई ।। द्रोपदी विपत में टेरत है।।

दुष्ट दुशासन बीच सभा में। खेंचत चीर लजाई ।। द्रोपदी विपत में टेरत है।।

छलकर जीत लियो हो पाण्डव को। दुर्योधन क ्रुरूराई ।। द्रोपदी विपत में टेरत है।।
सिय दुख दूर करो धनु तोरी। गज के फन्द छुडाई ।। द्रोपदी विपत में टेरत है।।
हरि होकर प्रह्लाद उबारो। क्यों अब द ेर लगाई ।। द्रोपदी विपत में टेरत है।।

तुम बिन कोन उबारे हमको। ले हो आन बचाई ।। द्रोपदी विपत में टेरत है।।

सुना रूदन जब क ृष्ण कन्हैया। खेंचत चीर बढ़ाई ।। द्रोपदी विपत में टेरत है।।

समाप्त

हा ेली नम्बर- 6
तुम मानो हो यमराज बलम के। साथ चलेगी सावित्री। टेक।

अश्वपति की पुत्री सावित्री। सत्यवान की नारी बलम क े ।। साथ चलेगी।।

अन्धे ससुर भये बनवासी। हार गये राज बलम क े ।। साथ चलेगी।।

एक समय पति के संग बन में। समिधा लेने जाय बलम क े ।। साथ चलेगी।।

सिर की पीड़ा जागी पति को। रो रही गोद थमाय ।।बलम के साथ चलेगी।।

उसी समय एक भीम भयंकर। आ पहुंचे यमराज बलम के ।। साथ चलेगी।।

पति क े प्राण लिये यम भाग े। ओ भी लागी साथ बलम के ।। साथ चलेगी।।

बहुत भांति यम ने समझाया। ना छोड़ा पति साथ बलम के ।। साथ चलेगी।।

पति औरत का धरम करम है। पति ही जीवन प्राण बलम क े ।। साथ चलेगी।।
अर्धांगी नर की नारी हुं। कैसे छोडंो साथ बलम के ।। साथ चलेगी।।
अपने पति को छोड़ सति तू। मुझसे ले वर मांग बलम के ।। साथ चलेगी।।
ससुर हमारे आंख्ेां पावें। पा लंे अपना राज बलम के ।। साथ चलेगी।।

सौ सुत होंवे पूज्य पिता क े। मेरे भी महराज बलम क े ।। साथ चलेगी।।

बचन बद्ध हो यम ने उसका। पति दीना लौटाय बलम के ।। साथ चलेगी।।

समाप्त

होली नम्बर-8

महराजा गोपी चन्द अमर भये। महराजा गोपी चन्द्र अमर भय।।
भर यौवन में योग लियो है। ।। महराजा गोपी चन्द अमर भये हैं।।
सुवरण काया देखि क ुंवर की। रो रही माता गोद लिये ।। महराजा गोपी चन्द अमर भये हैं।।
सुन हो बेटा इसी उमर में। पिता तुम्हारे स्वर्ग  गये ।। महराजा गोपी चन्द अमर भये हैं।।
मेरी आज्ञा सिर में राखों। अमर बनो सन्यास लिये ।। महराजा गोपी चन्द अमर भये हैं।।
राज ही पाठ सब छोड़ चले हैं। सोल सौ रानी रूलाय गये।। महराजा गोपी चन्द अमर भये हैं।।
ग ुरू चरणों में शीस नवाये। मैनाव ंती ज्ञान दिये ।। महराजा गोपी चन्द अमर भये हैं।।
कोमल अंग विभूति रमाये। झोली छप्पर हाथ लिये ।। महराजा गोपी चन्द अमर भये हैं।।
महल-2 अलग जगाये। घर-2 मांगन भीख लग े ।। महराजा गोपी चन्द अमर भये हैं।।

समाप्त

. होली नम्बर-9

अछहारे लछिमन दोष न दीजो क ैक ेई को। क ैक ेई हैं निर्दोष।। टेक।।

अछहारे लछिमन करम गति है बलवाना। मैं जानू दिल माही ।। लछिमन दोष।।

अछहारे लछिमन अंक लिखे जो विधि नाने। मेटि सक े न कोई ।। लछिमन दोष।।

अछहारे लछिमन चाह े सहसर यत्न करो। पार न पाया कोई ।। लछिमन दोष।।

अछहारे लछिमन होनी होक े रहती है। निश्चय लीजो जान ।। लछिमन दोष।।

अछहारे लछिमन सुख दुख जनम मरण शादी। पहले ही लिख जाय।। लछिमन दोष।।

अछहारे लछिमन मूरख बिरथा सोच करे। करम लिखा सो होय ।। लछिमन दोष।।
अछहारे लछिमन ज ैसे करम किये पहले। तैसे भोग े जाय ।। लछिमन दोष।।

समाप्त

होली नम्बर- 10
मत भूलो यशोदा नन्दन को। मन जपलो यशोदा नन्दन को।। टेक।।

पूरण ब्रह्म सकल अभिनासी। भूमि को भार उतारन को ।। मन जपलो।।

देवकी कोख में जनम लियो है। कंस असुर को मारन को ।। मन जपलो।।

प्रकट भये अब श्याम मुरारी। सन्तन को सुख देवन को ।। मन जपलो।।

मथुरा जन्म लियो अविनासी। गोक ुल लीला दिखावन को ।। मन जपलो।।

विश्व चराचर के अभिनासी। सन्तन भार उतारन को ।। मन जपलो।।

शेषहि शारद व्यास मुनि जी। जिनकी खोज लगावन को ।। मन जपलो।।

समाप्त

होली नम्बर- 11
धन तेरो पति धर्म सुलोचन। कटि भुजा लेखन लागी ।। टेक।।

सांरगी धनुष धरो लछिमन ने। बांण चलो बजरंग ।। सुलोचन।।

मेघनाद धरती पर गिर गये। भुजा चली रविनास ।। सुलोचन।।

कलम-दवात अरू स्याही मंगाई। करूं मैं तेरी जांच ।। सुलोचन।।

कटी भुजा जब लेखन लागी। हो गयी पूरी जांच ।। सुलोचन।।

तीन ही लोक में लछिमन जीते। उनकी किरती होय ।। सुलोचन।।

धन्य हो सुलोचन त ुमरे धरम को। सत सतवन्ती नारी ।। सुलोचन।।

समाप्त

होली नम्बर -12

क ैलाश में बस गये देव निरज ंन। अमर कथा शिव शंकर की।। टेक।।
एक समय कैलाश सभा में। नारद मिलने आय ।। निरजंन।।

चरण धोय चरणोंदक लीनू। आसन देय बिठाय ।। निरज ंन।।

अमर कथा जब बाचन लागे। शंकर ध्यान लगाय ।। निरजंन।।

सतयुग, त्र ेता, द्वापर, कलयुग। एक ही नाम धराय ।। निरजंन।।

सतयुग में सब सत्य की महिमा। द्वापर वेद पढ़ाय ।। निरजंन।।

़त्रेता में सब राम को पूज े। घर-2 देत बधाय ।। निरज ंन।।

कलयुग के सम युग नहिं कोई। नामहिं ले सुख पाय ।। निरजंन।।

घर घर में नित ठाक ुर पूजा। अतिथि पूजो जाय ।। निरजंन।।

सुनहुं पिया नारद की वाणी। वेद वृक्ष बतलाय ।। निरजंन।।

साखा वेद करम हैं पत्ते। दान पुण्य फल पाय ।। निरजंन।।

जो शिव शंकर कथा सुनत हैं। मन वांछित फल पाय ।। निरजंन।।

समाप्त

होली नम्बर-13
सांझ भई है माई यशोदा। घर नहीं आयो कन्हैया।। टेक।।

ग्वाल बाल सब संग में लेकर। वन में गय्या चुंगाय ।। यशोदा।।

भूख लगी जब वन में उनको। बैठे पंक्ति लगाय ।। यशोदा।।

मिल-ज ुल कर सब छाक को खावे। गय्या गई हैं चुराय ।। यशोदा।।

सबकी गय्या को ब्रह्मा ने। ग ुफा में दीनी लुकाय ।। यशोदा।।

छाक को खाय जब गय्या देखे। गय्या कहिं नहीं पाय ।। यशोदा।।

धौली धुमरी गय्या पुकारे। बंशी तान सुनाय ।। यशोदा।।

ग्वाल बाल सब सोच करत हैं। क ृष्ण उन्हें समुझाय ।। यशोदा।।

ऐसी माया रची जब प्रभु ने। गय्या वैसी बनाय ।। यशोदा।।

समाप्त

होली नम्बर - 14
तुम बड़ी तपस्या कीन भगीरथ। गंगा लाये भागरथी ।। टेक।।

भगीरथ जी ने करी है तपस्या। कीनो पवन अहार ।। भगीरथ।।

एक चरण दो भुजा उठाये। तप कीनो अति भार ।। भगीरथ।।

ब्रह्मा जी जब मगन भये हैं। तुम मांगो वरदान ।। भगीरथ।।

पितर हमारे सोरोपुर में। हम ग ंगा मिल जाय ।। भगीरथ।।

ग ंगा तुमको देगंे राजा। कोन ही गंगा समाय ।। भगीरथ।।
शिव शंकर जब मगन भये हैं। धाये कुंवर को छोड़ ।। भगीरथ।।
मांगले बेटा वर मांगले। जो मन इच्छा होय ।। भगीरथ।।

पितर हमारे अतर पड़े हैं। हम गंगा मिल जाय ।। भगीरथ।।

जटा निचोड़ क े गंगा दीनी । भर तुम्बा ले जाय ।। भगीरथ।।

ग ंगा-2 ग्वाल पुकारे। गंगा बही चली जाय ।। भगीरथ।।

लहर-बहर कर गंगा चली है। हरि तीरथ को जाय ।। भगीरथ।।

समाप्त

होली नम्बर- 15
हरि तुमने चरित अपार किया। मन्द्रांचल पर्व त पीठ लिये।

मन्द्रांचल की बनी है मथनिया। नाग की ड़ोर लगाय दिया ।। मन्द्रांचल।।

देव असुर ने मथो है समुन्द्र। बहु विधि रत्न निकाल दिये ।। मन्द्रांचल।।

कमल से ब्रह्मा प्रगट भये हैं। देव सबहि मिलने आये ।। मन्दांचल।।

देव असुर ने य ुद्ध कियो है। सबने हा हा कार किया ।। मन्दांचल।।
ब्रह्मा से देव गये हैं। चरण पड़े आशिष दिया ।। मन्दांचल।।
विष्णु जी ने युक्ति रचि है। दौलत में ललकार दिया ।। मन्दांचल।।

समुन्द ्र का हम मथन करेंग े। असुरन को भगवाय दिया ।। मन्दांचल।।

ऋषि मुनियों को कपिला दीनू। शंकर जी ने जहर पिया ।। मन्दांचल।।

समुन्द ्र मथने बने धनवन्तरि। सुधा सबन को बांट दिया ।। मन्दांचल।।

देवन को जब सुधा ही बांटा। राहु ने भी छल क े पिया ।। मन्दांचल।।

चन्द्र सूरज ने हरि से कहकर। राक्षस शीश कटवाय दिया ।। मन्दांचल।।

अमृत पीकर अमर कहाये। चन्द्र सूरज को ग ्रहण किया ।। मन्दांचल।।

समाप्त

होली नम्बर - 16
इन्द्र पुजा छुड़वाय श्याम ने गोवर्धन गिरि पुजवाये ।। टेक।।

इन्द्र पूजन कारण ब्रजवासी। मेवा मिठाई बनाय ।। श्याम ने।।

मातु से पूछे क ृष्ण कन्हैया। पिता दिया े बतलाय ।। श्याम ने।।

काहे कारण पूजत इन्द्र को। जो क ुछ काम न आय ।। श्याम ने।।

वन पर्वत में गय्या चुगाये। पर्वत पूजो जाय ।। श्याम ने।।

क ंचन थाल में भर के मिठाई। ब्रजवासी जब जाय ।। श्याम ने।।

गोवर्धन गिरि पूजा कीनी। क ृष्ण सहित घर आय ।। श्याम ने।।

सुरपति कोप कियो तब ब्रज में। मुसलाधार बहाय ।। श्याम ने।।

गोवर्धन गिरि नख पर धारो। ब्रज वासिन को बचाय ।। श्याम ने।।

सुरपति गरब मिटो क्षण माही। दरसन क े हित आय ।। श्याम ने।।

क ृष्ण चरण पड़ी विनय करत है। हे प्रभु लाज बचाय ।। श्याम ने।।

बहुत भांति हरि ने समुझाई। इन्द ्र चले सिर नाय ।। श्याम ने।।

समाप्त

होली नम्बर -17
भजलो हरि नाम पियारा है। हरि नाम पियारा है ।। टेक।।

जल बिच कमल कमल बिच कलियां। ता पर भंवर लुभाया है ।। भजलो।।

गज और ग्राह लड़े जल भीतर। लड़त-लड़त गज हारा है ।। भजलो।।

जौ भर सुण्ड़ रहो जल बाहर। तब हरि नाम पुकारा है ।। भजलो।।

लंका सागर सेतु बधायो। कपिदल पार उतारा है ।। भजलो।।

भिलनी क े बेर सुदामा क े तण्डुल। रूचि-रूचि भोग लगाया है ।। भजलो।।

दुर्यो धन घर मेवा त्याग े। साग विदुर घर खाया है ।। भजलो।।

जिनकी सूरत है लड़ने की। पीछे पग नहीं टारा है ।। भजलो।।

समाप्त

होली नम्बर - 18
किस विधि आज्ञा देहू लाल री बाली उमरिया तेरी है।। टेक।।

द्रोणाचार्य बड़े भट योद्धा। जिनने रचायो ब्यूह ।। लाल रे।।

ब्यूह क े द्वारे सात बने हैं। तोड़ सक े न कोय ।। लाल रे।।

चारों भाई भेद न जाने। अर्ज ुन गये हैं दूर ।। लाल रे।।
भीम, नक ुल, सहदेव, युधिष्ठर। मन में करे बहु सोच ।। लाल रे।।

अभिमन्यु क ेहि विधि नहीं माने। ईश्वर देहूं सहाय ।। लाल रे।।

समाप्त

हा ेली नम्बर -19

ठाक ुर मिलने जाय सुदामा मुठ ्ठी भर चावल लेकर के।। टेक।।

चलत सुदामा द्वारिका पहुंचे। क ृष्ण क े मन्दिर जाय ।। सुदामा।।

क ुशल बात मोहन ने पूछी। बहुत दिनो ं से आय ।। लाल रे।।

भाभी ने मुझको क्या-2 दीना। बगल में गठरि छिपाय ।। लाल रे।।

हंस कर प्रभु ने गठरी खोली। रूचि-रूचि भोग लगाय ।। लाल रे।।
मांगी विदा प्रभु से घर आय। इन्द्र पुरि सी पाय ।। लाल रे।।

समाप्त

हा ेली नम्बर -20
सागर पुल बंधवाय, रघुवर कपिदल पार उतारन को ।। टेक।।

सागर पार कियो है डेरा। लखन सहित दोनों भाई ।। रघुवर।।

भक्त विभीषण राम मिलो है। लंका भेद बताय ।। रघुवर।।

बाली तनय अंगद बल सागर। लंका दूत पठाय ।। रघुवर।।

कह रावण सुन केहि कपि आये। कारण देहूं बताय ।। रघुवर।।

अंगद रावण को समझाये। समझ-समझ नहीं आय ।। रघुवर।।

तोही सागर को मान भयो है। सागर छिन में आय ।। रघुवर।।

राम लछिमन नल और नीला। तपस्वी चारों कहाय ।। रघुवर।।

क ुम्भकरण आछिक बलवाना। ये सब मारे जाय ।। रघुवर।।

जब अंगद यह बात सुनावे। रावण कोप चढाय ।। रघुवर।।

रे रे बन्दर हट जा यहां से। ताहि दुंगा बंधवाय ।। रघुवर।।

रे दशमुख सुन समुझ रे मन में। तोहे काल गिराय ।। रघुवर।।

सोने की लंका छार बनेगी। औरत विधवा होय ।। रघुवर।।

निशिचर वीरो पकड़ो बन्दर। पूछ में आग लगाय ।। रघुवर।।

जलती पूछ से हनुमान जी ने। सारी लंका जलाय ।। रघुवर।।

क ूद-क ूद कर हनुमत जी ने। सागर पूछ बुझाय ।। रघुवर।।

समाप्त

होली नम्बर-21

थकित भये कवि लोग। श्यामा महिमा तुम्हारी वरनिन जाय।। टेक।।

अछहारे श्यामा सतयुग में नरसिंह भये। हिरण कश्यप को मार।। श्यामा।।

अछहारे श्यामा त्र ेतायुग में राम भये। लंकापति को मार ।। श्यामा।।

अछहारे श्यामा द्वापर युग में क ृष्ण भये। क ंशासुर को मार ।। श्यामा।।

अछहारे श्यामा कलयुग में बद्रीनाथ भये। बौद्ध भये अवतार ।। श्यामा।।

अछहारे श्यामा सृष्टि रचन पर कीर्ति भये। नाभी में कमल सुहाय ।। श्यामा।।

अछहारे श्यामा कमल से ब्रह्मा से प्रकट भये। तापर विश्व रचाय ।। श्यामा।।

अछहारे श्यामा ध्यान लगाय जो नर गावे। नैय्या पार लगाय ।। श्यामा।।

समाप्त

होली नम्बर -22
आज बिन्द्रावन आये हरि। नाचत रास रचाये हरि ।। टेक।।

एक समय यमुना क े किनारे। सखियां गोरस लेक े चली ।। नाचत ।।

अक्षत चन्दन बेल की पाती। सखियां हाथ में लेक े चली ।। नाचत ।।

विलत नाव में क ृष्ण कन्हैया। नाव डगामग देखी ड़री ।। नाचत ।।

कोई हरि को हंस के सुनावे। कोई गले लिपटाय ।। नाचत ।।

कोई कहे हम हम ब्रजवासी। हम संग प्रभु ने प्रीति करी ।। नाचत ।।

जब प्रभु ने सखियां समझाई। अपन े अपने घर को चली ।। नाचत ।।

बिद्रावन की कुन्जगलियन की। बात करे रंग रस की भरी ।। नाचत ।।

समाप्त

होली नम्बर - 23

गई-गई असुर तेरी नार मन्दोदरी। सिया मिलन गई बागा में।। टेक।।
थलिया भरक े भोजन लाई। गडुवा भरक े नीर ।। मन्दोदरी।।

ले हो सीता भोजन खावो। तुम लंका की नारी ।। मन्दोदरी।।

ना हम तुमरो भोजन पावें। ना लंका की नारी ।। मन्दोदरी।।

कौन राजा की बेटी कहावे। कौन राजा घर ब्याही ।। मन्दोदरी।।

जनक राजा की बेटी कहावे। दशरथ के घर ब्याही ।। मन्दोदरी।।

कौन पुरूष की नारी कहावे। लंका केहि विधि आय ।। मन्दोदरी।।

राम चन्द्र की नारी कहावे। रावण लंका दिखलाय ।। मन्दोदरी।।

तुम तो सत्य की नारी कहावे। असुर अवध घर आय ।। मन्दोदरी।।

जो मैं होगीं सत्य की सीता। होय असुर क ुल नास ।। मन्दोदरी।।

मेघनाद से पुत्र हमारे। कुम्भकरण बल भाई ।। मन्दोदरी।।

लंका जैसो कोट हमारो। समुद्र ज ैसी खाई ।। मन्दोदरी।।

मेरे बलम को काल न खाये। कैसे होवे नास ।। मन्दोदरी।।

हनुमन्त ज ैसे पायक जिनक े। संग लछिमन भाई ।। मन्दोदरी।।

जलती आग में कूद पड़ेग े। वे दोनों तपस्वी भाई ।। मन्दोदरी।।

सारे क ुल का नास करेंग े। राज विभीषण पाय ।। मन्दोदरी।।

समाप्त

होली नम्बर-24

महाराजा हरीश्चन्द्र भये दानी-2 । विप्र को दीनी रजधानी।। टेक।।

सत्य क े कारण राजा रानी। बिकन लगे रोहित प्राणी ।। महराजा।।

फिरत -फिरत काशी में पहुंचे। ग्राहक ढंूढे मुनी ज्ञानी ।। महराजा।।

शुद्र क े घर में आप बिके हैं। पंड़ित क े घर सुत रानी ।। महराजा।।

मुर्दा घाट में वास कियो है। कर लेवे मरघट दानी ।। महराजा।।

रोहित सुत विषधर ने काटो। रोवन लागी नृपरानी ।। महराजा।।

रानी ने रोहित को मरघट। कर मांग े हरिश्चन्द्र दानी ।। महराजा।।

रानी साड़ी फाड़न लागी। त्रिलोकी तब कप जानी ।। महराजा।।

ताही समय प्रगटे भगवाना। धन्य अहो राजा रानी ।। महराजा।।

रोहितास को दियो जगाई। राज सिंहासन दिलवानी ।। महराजा।।

समाप्त

होली नम्बर-25
रथ फेरी कहे भगवान भरत मेरी प्रजा को दुख मत दीजो।। टेक।।
बैठी अयोध्या राज करो तुम। निरमल सरयु तीर ।। भरत।।

भूखन को तुम भोजन दीजो। प्यासे को जलदान ।। भरत।।

जब-2 माता सुध लें मेरी। उन्हें बधाना धीर ।। भरत।।
रोगी को तुम औषधि दीजो। दुखियन धीरज दान ।। भरत।।

विद्यादान करो अनपढ़ को। नंगन वस्त्र दान ।। भरत।।

धरम रहित को धरम सिखाओ। अज्ञानी को ज्ञान ।। भरत।।

भूले को सनमार्ग  बता दो। क ंगालन गृहदान ।। भरत।।
दुर्ज न को समझाओ विधि से। सज्जन को सनमान ।। भरत।।

चौदह वर्ष रहे बनबासी। फिरि मिलि हैं हम आन ।। भरत।।

मात पिता की सेवा करना। प्रजा को बहुमान ।। भरत।।

समाप्त

हा ेली नम्बर -26

करूणा कर टेरत वैदेही-2 , जब निशिचर ले जाई ।। टेक।।

योगी भेष बनायो दशमुख। मृग मारीच बनाई ।। करूणा।।

क ंचन मृग मारो रघुनन्दन। लछिमन नाम सुनाई ।। करूणा।।

सीता भयवस पठये लछिमन। देखो प्रभु कहां जाई ।। करूणा।।

सूनी मड़ैय्या देखी निसाचर। छलकर सिया ले जाई ।। करूणा।।

रथ पर चढ़ि विलपत सीता। गिध उठे सुनिर्धाइ  ।। करूणा।।

चोंच लगाई महाबल कीनो। रावण क्रोध कराई ।। करूणा।।

पंख बिना खग कीनू दशानन। तब सिया रथ बैठाई ।। करूणा।।

समाप्त

होली नम्बर- 27
दधि मथे यशोदा माई कदम तल झूला कन्हैया पालाने।। टेक।।

काहिन की ये बनी है मथनिया। काहे को यो माट ।। कदम।।

अगर चन्दन की बनी मथनिया। सोने को यो माट ।। कदम।।

औटन दूध धरो अगनि पर। उबलत दौड़ी माई ।। कदम।।
ताहि समय उठी धाये कन्हैया। मथत दहि को खाय ।। कदम।।

सब मटक े इत उत कर दीने। आय यशोदा माई ।। कदम।।

अब ही से ये करम किये तू। दीनू उखल बंधाय ।। कदम।।

समाप्त

होली नम्बर- 28

तुम गरज चले हनुमत वीर फल क्यों तोड़े शिव की बाड़ी।। टेक।।
शिव शंकर ने बाग लगायो। हनुमन्त चौकीदार ।। दिगम्बर।।

राम लछिमन भूख लगी है। लछिमन फल को लाय ।। दिगम्बर।।

लछिमन योद्धा बाग गये हैं। माली छिप-छिप जाय ।। दिगम्बर।।

दो फल तोड़ लिये लछिमन ने। तब तक आयो माली ।। दिगम्बर।।

लछिमन योद्धा घर को लौटे। हनुमन्त मारे डाक ।। दिगम्बर।।

हनुमत जी ने मुटकी मारी। धरती हिल मिल जाय ।। दिगम्बर।।

अटल भक्ति है रघुवर जी की। लछिमन मुरछा जाय ।। दिगम्बर।।

पार्वती उठी देखी क े बोली। बाग में पड़ी गयो चोर ।। दिगम्बर।।

बैल सवारी शिव जी आये। राम से युद्ध मचाय ।। दिगम्बर।।

योद्धा लड़े हैं चौद भुवन में। इन्द ्रासन कपि जाय ।। दिगम्बर।।

शिव की गैरा बोल उठी है। सुवरन काया देखी ।। दिगम्बर।।

शिवजी देखें काया अपनी। राम चरण पड़ि जाय ।। दिगम्बर।।

समाप्त

होली नम्बर- 29

ले बस्तर नन्द ुलाल कदम चढ़ि खड ़ो बजा गयो बाँसुरिया।। टेक।।

एक समय ब्रज की सब सखियां। करन चली स्नान ।। कदम।।

ताहि समय मन मोहन आये। ले बस्तर चढ़ि बैठि कदम ।। कदम।।

सबही देखी उठी सब सखियां। चीर हरे सब जाय ।। कदम।।

बोले श्याम मधुर सब बतियां। तुम सब छोड़ो लाज ।। कदम।।
चीर हमारी दो गिरधारी। हम नंगी प्रभात ।। कदम।।
छोड़ी लाज को सन्मुख आयो। तुम संग खेलें फाग ।। कदम।।

समाप्त

होली नम्बर- 30
सुमिरो सीता राम भया कोई हीरा जनम नहीं पाओग े।। टेक।।

इस कलयुग में दो ही बड़े हैं। इक ग ंगा इक राम भया ।। कोई हीरा।।

पाप कटन को गंगा भयी है। नाम जपन को राम भया ।। कोई हीरा।।

इस कलयुग में दो ही बड़े हैं। इक गाई इक विप्र भया ।। कोई हीरा।।

क ुल तारन को गाय भई है। करम करन को विप्र भया ।। कोई हीरा।।

इस कलयुग में दो ही बड़े हैं। इक माता इक पिता भया ।। कोई हीरा।।

जनमत ही से सुख दे माता। पालन को यो पिता भया ।। कोई हीरा।।

निसदिन ज्योति करे त्रिभुवन में। इक चन्दा इक सूरज भया ।। कोई हीरा।।

सबसे बढ़कर दोनो ं जग में। राम सुमिर अरू दान भया ।। कोई हीरा।।

समाप्त

होली नम्बर- 31

ऐसो न देखो दशरथ राज। ऐ निर्मोही दशरथ राज।। टेक।।

भरत शत्र ुघन राज दियो है। राम लक्ष्मण को वनवास ।। ऐ निर्मोही।।

रावण राजा ने भेष लियो है। ऐसो ध्यान धरो वैराग ।। ऐ निर्मोही।।

हाथ में लोटा कांधे धोती। जाय खड ़ो सीता दरवार ।। ऐ निर्मोही।।

देहो सीता योगी को भीक्षा। द्वार खड़े हैं योगी राज ।। ऐ निर्मोही।।

भीक्षा लेकर सीता आई। कपटी ले गयो लंका द्वार ।। ऐ निर्मोही।।

रानी मन्दोदरी रावण पूछे। देखु अस ुर में तेरी नार ।। ऐ निर्मोही।।

जो रावण हरि लाये हैं सीता। सीता पति हरि क े अवतार ।। ऐ निर्मोही।।

समाप्त

हा ेली नम्बर- 32
किस बन ढूंढो जाय राधिका। तेरो कन्हैया बनवासी।। टेक।।

घर छोड़ा छोड़े पति अपने। हरि से प्रीति लगाय ।। राधे।।

हरि ने हम सब तजि अकेली। वन वन में पहुंचाय ।। राधे।।
भरियो जोवन लूट लिया े है। हमसे प्रीति लगाय ।। राधे।।
गोक ुल ढूंढो बिन्द्रावन ढुंढ ू। ढूंढ फिरे नन्दलाल ।। राधे।।

ब्रज में अब हरि आय मिले हैं। मन की पीर मिटाय ।। राधे।।

तुम तो ठग हो हमें ठगत हो। नटवर भेष बनाय ।। राधे।।

ब्रज में लाकर वन में फिरावत। मुरली मधुर बजाय ।। राधे।।

समाप्त

हा ेली नम्बर- 33
अली धूम मचे बृज कुंजन। सखि धूम मचे बृज क ुंजन में।। टेक।।

फ ुलि गये टेसु निकसी गये अम्बा। भवर ग ुजारे वन वन में ।। अलि।।

आओ गोरी खेली ले होली। हो मतवाली फाग ुन में ।। अलि।।

क ेशर को सब रंग बनो है। छिड़कत हैं सब सखियन में ।। अलि।।

फाग ुन मास सुहावन आली। उड ़त ग ुलाल सजन तन में ।। अलि।।

मोर मुक ुट पिताम्बर पहन े। खेलें कन्हैया सखियन में ।। अलि।।

मन्दिर-मन्दिर ग्वालिन आक े। भूल रहीं हैं जोवन में ।। अलि।।

नटवर श्याम रंगीलो मोहन। करत सुआनन्द बातन में ।। अलि।।

समाप्त

होली नम्बर-34
जनक राजा ने यज्ञ रचो श्री शिव के धनुष क े भंजन को।। टेक।।

रावण आयो बाणास ुर आयो। भूपति भीड़ पड़ी भारी ।। श्री शिव।।

देश ही देश क े भूपति आये। राम परशु से धनुधारी ।। श्री शिव।।

राम लछिमन मुनि संग आये। कठिन प्रतिज्ञा अति भारी ।। श्री शिव।।

जनक कुमारी क े हाथ में माला। कौन राजा हैं अधिकारी ।। श्री शिव।।
बीच स्वयंबर सिया घुमत है। वीर उठे सब धनुधारी ।। श्री शिव।।

तिल भर चाप सक े न उठाई। शर्म भयी है अति भारी ।। श्री शिव।।

राम ने कर से धनुष उठाया। तोड़ा चाप कठिन भारी ।। श्री शिव।।

जय माला श्री राम ने ड़ाली। जिन तोड़े हैं धनुष भारी ।। श्री शिव।।

समाप्त

होली नम्बर- 35
लागी गयो है बाण रानी दशरथ मछलिया छेदन में।। टेक।।

एक धेवर ने मछलिया मारी। लायो मेरे पास ।। रानी।।
दुख क े कारण रानी से आये। जहर मिला दे आज ।। रानी।।

श्राप था श्रवण मात-पिता को। लागि गयो है बाण ।। रानी।।

जिस तरकस से श्रवण मारो। नदी में दीनू बहाय ।। रानी।।

उस तरकस को मछलिया ने खाया। पड़ी गयो धेवर जाल ।। रानी।।

मछली आयी मेरे घर में। देखत सुन्दर रूप ।। रानी।।

दशरथ राजा मॉंस कटत हैं। अंगूठा लागि फांस ।। रानी।।

समाप्त

होली नम्बर-36

रचो-मचो महारण रंग फाग, कुरूक्षेत्र कौरव पाण्डव को।। टेक।।

कौरव पाण्ड़व भय्या चच ेरे। अपने समय बलिहारी ।। फाग।।

कौरव पाण्ड़व ज ुआ खेलत हैं। पाण्ड़व पड़ि गये हार ।। रानी।।

द्रोपदी जी के चीर को खींचे। दुष्ट दुशाशन आय ।। फाग।।

कपट का पासा कौरव चलायो। पाण्डव हारे राज ।। फाग।।

बारह बरष वनवास चलत है। तेरही गुप्त वास ।। फाग।।

कौरव पाण्ड़व बैर पडत है। कर भूमि संग ्राम ।। फाग।।

ये दोनो ं खूब लडे कुरूक्षेत्र। अबीर उडो तलवार ।। फाग।।

भीम, नक ुल, सहदेव, युधिष्टर। अर्ज ुन भये नन्दलाल ।। फाग।।

द्वापर जाने कलयुग आने। मिट गयो क ुल घरवार ।। फाग।।

जो नर होली ध्यान से गावे। तरि बैक ुण्ठ को जाय ।। फाग।।

समाप्त

होली नम्बर-37
किसने बतायो भेद लला। बालक गोकुल मे ं हैं करके।। टेक।।

मंत्री से जब कंस ने पूछा। नारायण कहॉ ं पाय लला ।। बालक।।

मंत्री बोला कंस राजा से। जहॉं होवे जय ध्यान लला ।। बालक।।

क ंस राजा जब ढूॅंढन लागे। सबहिन को धमकाय लला ।। बालक।।

अपने पिता से बोलन लागो। छोडियो राम का नाम लला ।। बालक।।

उसक े पिता जब बोलन लागो। वे मारे करतार लला ।। बालक।।

अपने पिता का क ंस राजा ने। डाला कारागार लला ।। बालक।।

मथुरा नगर में हुकुम सुनाई। कोई न जपियो राम लला ।। बालक।।

कवि जो कहत है बालक लीला। गोकुल दूत लगाय लला ।। बालक।।

समाप्त

होली नम्बर -38
पाण्डव हैं ब्रजराज भगत। सोई टेर सुनी मुरलीधर ने।। टेक।।

राजा युधिष्ठर ज ुआ बीच बैठै। कौरव कपट चलाय ।। भगत।।

राजही पाठ सब पाण्ड़व हारे। द्रोपदी को हार ।। भगत।।

अर्ज ुन अस़्त्र ज ुआ बीच हारे। गये धनुष को हार ।। भगत।।

भीम नक ुल सहदेवा बैठ े। सम्पत्ति सब ही हार ।। भगत।।

क ेश पकड़ द्रोपदी को लाये। दुशासन छलकारी ।। भगत।।

चीर को खींचत नीच दुशासन। तौ नहीं पाया े पार ।। भगत।।

हरि-हरि टेर के द्रोपदी र्रोइ । धाये गरूड़ सवारी ।। भगत।।

समाप्त

होली नम्बर -39
तुम तो भयी तपवान क ुंवर। भागीरथ गंगा लाये हैं।। टेक।।

कहां से यो निकसी गंगा। कहां को रमि जाय ।। कुंवर।।
हरि गुरू चरणों से निकसी गंगा। हरिद्वारे रमि जाय ।। कुंवर।।
कहां भाई तीरथ बने हैं। कहां बने हैं घाट ।। क ुंवर।।

प्रयाग े में तीरथ बने हैं। मनकरणी को घाट ।। कुंवर।।

ग ंगा तुमरी लहर बड़ी है। हरि की पैड़ी धाम ।। कुंवर।।

ग ंगा तुमरो नाम भयो। यमुना में मिल जाय ।। कुंवर।।

हरि की पैड़ी जो-जो नावे। तरि बैक ुण्ठ को जाय ।। क ुंवर।।

समाप्त

होली नम्बर-40
हमें उतारो पार मल्हा। हमसे उतराई ले ली जो।। टेक।।

कौन राजा के पुत्र कहावे। कहां तुम्हारो गॉव लला ।। हमसे।।

राजा दशरथ क े पुत्र कहावे। अवध हमारो गॉव मल्हा ।। हमसे।।

काहे कारण पार उतारी हो। हमको दे समुझाई लला ।। हमसे।।
माता क ैकई ने बचपन दो वर मॉग े। पिता दियो वनवास मल्हा ।। हमसे।।
हमको ता वनवास दियो है। भरत दियो है राज मल्हा ।। हमसे।।

चरण धोय चरणोदक लिन्हो। तबही उतारू पार लला ।। हमसे।।
सरयू पार गये भगवाना। भरत ही आये धाय ।। हमसे।।

होली नम्बर -41
वीर हुए रणधीर जगत में। लव कुश दोनों वीर हुए।। टेक।।

राम लछिमन वन से आये। हो गयी जै-ज ै कार ।। जगत में।।

एक धोबी ने धोबियन मारी। मैं नहीं हूॅं वह राम ।। जगत में।।

जो रावण ने हरि है सीता। अपने घर ले जाय ।। जगत में।।
तेही कारण तेही सत्य की सीता। बन में दीना छोड़ा ।। जगत में।।

गर्भवती श्री सत्य की सीता। वन में इत-उत जाय ।। जगत में।।

महामुनि का आश्रम देखा। पहॅुंची वहॉ पर जाय ।। जगत में।।

चन्द ही रोज में जग जननी क े। दो बालक हो जाय ।। जगत में।।

वे दो बालक ऐसे जन्मे। दिन-दिन ज्योति बढ ़ाय ।। जगत में।।
अवध पुरी में राम चन्द्र ने। दीनू यज्ञ कराय ।। जगत में।।
श्याम वरण एक घोड़ा छोड़ा। शत्र ुघन देनु पढ़ाय ।। जगत में।।

लव ने उस घोड़े को पकड़कर। दीनू पेड़ बधाय ।। जगत में।।
इत शत्र ुघन एक फौज को लेकर। उत लव-कुश दोनों भाई ।। जगत में।।
जान बचाकर शत्रुघन भाग े। क्षण में फौज हराय ।। जगत में।।

कौन माता ने जन्म दियो है। कौन पिता क े जाय ।। जगत में।।

लड़ना है तो लड़ियो लड़ाई। घर से मतलब क्या है ।। जगत में।।

दण्ड़कपुर में घर है हमारा। लव कुश दोनो ं भाई ।। जगत में।।

जो जादो इस होली को गावे। तरि बैक ुण्ठ को जाय ।। जगत में।।

समाप्त

होली नम्बर -42
श्याम मुरारी क े दर्शन को जब विप्र सुदामा जाय हरि।। टेक।।

बिप्र सुदामा द्वार खड ़े हैं। पूछत क ृष्ण कहॉ हैं हरि ।। जब।।

हाजर वासी गये जब भीतर। द्वार खड़े हैं बिप्र हरि ।। जब।।

बालापन से मित्र हमारे। रोके नहीं क्षण मात्र हरि ।। जब।।
बॉह पकड़ क े निकट बैठाये। रूकमणी चरण दबाय हरि।। जब।।

तिनहि मुठ ्ठी तण्ड ुल लाये। देन े में आवे लाज हरि ।। जब।।
देखत पोटली खेंच लिये हैं। रूचि-रूचि भोग लगाय हरि ।। जब।।
मॉगिले बिप्र जो मन भावे। जो मन इच्छा होय हरि ।। जब।।

अपने मुह से मैं नहीं मॉग ू। जो मन इच्छा दीज े हरि ।। जब।।

कॉस बॉस की झोपडी बनी है। ब्रह्म पुरी सब रत्न भरी ।। जब।।

दुख दरिद ्र सब दूर कियो है। सुख सम्पत्ति सब दीज े हरि ।। जब।।

हरि के देने में विलम्ब न होवे। लेन े में लागि देर हरि ।। जब।।

समाप्त

होली नम्बर - 43

भये-भये हैं पाण्ड़व अवतारी। जिन छलपति कौरव जडमाही।। टेक।।
बालेपन में मौन बली को। जहर पिलाकर दे मारी ।। भये।।

पॉचों पाण्डव माता क ुन्ती। लाख भवन में सब डारी ।। भये।।

निर्बल क े हैं राम सहाई। पिता बिदुर ने दुख टारी ।। भये।।

भूले भटक े पॉचों भाई। राजा डर पद दुख टारी ।। भये।।

दु्रपद सुत को जीत लियो है। धन-धन भारत यश भारी ।। भये।।

कपटी शक ुनी पासा डारि। राज दियो है सब हारी ।। भये।।

दांव चढाई द्रोपदी रानी। लाज न तिल भर है सखी ।। भये।।

खंेचत चीर दुशासन हारो। गिरधर प्रभु की बलहारी ।। भये।।

मुरलीधर नटवर गिरधारी। अपनी बहिन की दुख टारी ।। भये।।

भेष बदल क े समय बिताया। देखो करम की गति न्यारी ।। भये।।

लौट क े आये पॉचों पाण्डव। संग लिये द्रोपदी रानी ।। भये।।

दीजो भाई राज हमारो। सत्य धरम को मत टारी ।। भये।।

राज तुम्हारो जबहि मिलेगा। युद्ध करूंगा अति भारी ।। भये।।

कौरव पाण्डव युद्ध भयो है। धन कलयुग की बलहारी ।। भये।।

कपटी कौरव नास भयो है। मुरलीधर की बलहारी ।। भये।।

समाप्त

होली नम्बर -44
वन से आये राम चलो। दर्शन करि आयें ठाक ुर के।। टेक।।

राम जी आये लछिमन आये। आई सीता माई चलो ।। दर्शन।।

पहले मिले हैं भाई भरत से। फिर कौशल्या माई चलो ।। दर्शन।।

घर-घर मिले हैं अयोध्या वासी। पीछे क ैकई माई चलो ।। दर्शन।।

मातु कौशल्या बोलन लागी। क ैसे जीती लंका चलो ।। दर्शन।।

घाट ही बाट लछिमन क े रोके। कूदी पड़े हनुमान चलो ।। दर्शन।।

रावण मारो असुर सब मारे। राज विभीषण देय ।। दर्शन।।

जाय बचाके सिया घर लाये। गावत तुलसीदास ।। दर्शन।।

समाप्त

होली नम्बर- 45

हन गर्व करो मत कोई लला जिन गर्व किये सोई हारे लाले।। टेक।।

भष्मासुर ने करि है तपस्या। वर दीनू त्रिपुरारी लला ।। हन गर्व।।

शिव शंकर ने कंकण दीना। शिव के उपर मारी लला ।। हन गर्व।।

तीन ही लोक मंे फिरत सदा शिव। छोड़ी चले हैं नारी लला ।। हन गर्व।।

शंकर शरण में गये माधव क े। रूप दिखाय अपार ।। हन गर्व।।

नच करत निशिचर के सन्मुख। होई तुम्हारी नारी लला ।। हन गर्व।।

मोहित होकर निशिचर नाचा। उल्टा होय छार लला ।। हन गर्व।।

लंका असुर ने करि है तपस्या। लंका में अधिकार लला ।। हन गर्व।।

पाकर लंका गर्भ कियो है। लंका डडोरी छार लला ।। हन गर्व।।

हिरण्य कश्यप ने करि है तपस्या। अमर भये परिवार लला ।। हन गर्व।।

काया अमर को गर्भ कियो है। मुक्त भयो दरवार लला ।। हन गर्व।।

बहु विधि यज्ञ कियो है बलि ने। इन्द्रासन है सार लला ।। हन गर्व।।

तीन चरण में गर्व मिटायो। पृथ्वी तल अधिकार ।। हन गर्व।।

समाप्त

होली नम्बर- 46
भई-भई धरम की जीत। अर्जुन तुम क्यों आस निरास भये।। टेक।।
कौरव पाण्डव मिले आपस में। पासा खेल रचाय ।। अर्जुन।।

डार कपट का पासा शकुनी। पाण्डव राज्य हराय ।। अर्जुन।।

हार सिंगार जुआ बिच हारे। दीनी द्रोपदी हार ।। अर्जुन।।

धन दौलत सब हार चुके हैं। हारे शहर बाजार ।। अर्ज ुन।।

अर्ज ुन धन ुष ज ुआ बिच हारे। सहदो पुस्तक हार ।। अर्ज ुन।।

भीमसेन की गदा गई है। जोसिल चक्र हथियार ।। अर्ज ुन।।

समाप्त

होली नम्बर-47

भगवान को भक्त पियारा है।।2।। काग कहे तुम सुनहो गरूण ।। टेक।।

गर्व कियो है राजा बलि ने। उनको पाताल सिधारा है ।। भगवान को।।

गर्व कियो है लंका पति रावण। उनकी लंका क्षार हुई ।। भगवान को।।

गर्व कियो है चन्द्र सूरज ने। उनको गरूण ने घेरा है ।। भगवान को।।
गज और ग्राह लडे जल भीतर। लड़त-लड़त गज हारा है ।। भगवान को।।

जौ भर सुण्ड रहो जल बाहर। तब हरि नाम पुकारा है ।। भगवान को।।

लंका सागर सेतु बधायो। कपिदल पार उतारा है ।। भगवान को।।

ब्रज के उपर वर्षा बरसी। नख पर गिरवर धारा है ।। भगवान को।।
भिलनी क े बेर सुदामा क े तण्डुल। रूचि-रूचि भोग लगाया है ।। भगवान को।।
दुर्यो धन घर मेवा त्याग े। साग विदुर घर खाया है ।। भगवान को।।

जिनकी सूरत है लड़ने की। पीछे पग नहीं टारा है ।। भगवान को।।

समाप्त

होली नम्बर-48

अर्ज ुन कह सुन श्याम सुन्दर। मोर ध्वज राजा सतधारी।। टेक।।

श्याम सुन्दर नटवर मोहन ने। करी भगत की जॉच ।। सुन्दर।।

राजा यम को शेर बनाया। दोनों बनी गये साधू ।। सुन्दर।।

तीनों छल मिलि जाय चले जब। मोर ध्वज के द्वार ।। सुन्दर।।

हाथ जोड़ के राजा खड़े हैं। मैं बड़ भागी होय ।। सुन्दर।।

जो आज्ञा हो पूरण करी हो। मैं हॅ ू तुमरो दास ।। सुन्दर।।

जब तक हमरो शेर न खावे। ना हम भोग लगाय ।। सुन्दर।।

नर को अहारी शेर हमारो। इसको भोग लगाय ।। सुन्दर।।

लेकर आरा राजा रानी। चीरो अपनो पूत ।। सुन्दर।।

ऑसू गिरेंग े नहीें खायेगा। धरम तुम्हारो जाय ।। सुन्दर।।

राजा रानी पुत्र को चीरे। ऑसू एक न आय ।। सुन्दर।।

चिरे पुत्र को शेर खिलावे। भोग न शेर लगाय ।। सुन्दर।।

हाथ जोड़ के राजा खडे हैं। क्यों नहीं भोग लगाय ।। सुन्दर।।

राजा रानी मिलकर भूनो। थाली भर भर खाय ।। सुन्दर।।

राजा रानी पुत्र पुकारे। तब हम भोग लगाय ।। सुन्दर।।

जब राजा ने पुत्र पुकारा। रोहित पास में आय ।। सुन्दर।।

समाप्त

होली नम्बर- 49
मिरगा मारन जाय पिया मोसे भूल भयी है वावन में।। टेक।।

एक समय मिरगा मारन को। रथ में बैठी जाय ।। प्रिया।।

तेही वन में श्रवण जल भरने। मात पिता क े साथ ।। प्रिया।।

जल से तुमड भरन चला जब। भक-भक शब्द सुनाय ।। प्रिया।।

मैं समझा कोई मृग जल पीवे। मारो मैंने बाण ।। प्रिया।।

बाण लगा श्रवण के उर में। हा-हा शब्द सुनाय ।। प्रिया।।

हा-हा शब्द सुना जब मैंने। गया नदी क े पास ।। प्रिया।।

गद-गद कंठ वचन वह बोला। मात-पिता हैं पास ।। प्रिया।।

लेकर तुमड चला वहॉ से। अन्धे बैठे पास ।। प्रिया।।

इतनी देर भयी क्यों बेटा। क्या विपदा तुम्हे ं आय ।। प्रिया।।

मैं बेटा नहीं राजा दशरथ। लाल मरण हाथ ।। प्रिया।।

गद-गद कंठ वचन वह बोले। अन्धे दोना े साथ ।। प्रिया।।

ज ैसी मरण हमारी राजा। वैसी तुम भी पाय ।। प्रिया।।

समाप्त

होली नम्बर- 50

जाके शीश जटा पर गंग सम्भो तुम क्यों ना खेलो होली लला।। टेक।।
राम जी खेलें लछिमन खेलें। खेलें सीता नारी ।। सम्भो।।
ऋषियन क े संग ब्रह्मा खेलें। खेलत सरस्वती नारी ।। सम्भो।।
भक्तन क े संग विष्णु खेलें। खेलत लक्ष्मी नारी।। सम्भो।।

क ृष्ण क े संग बलदेव भी खेलें। खेलत राधा नारी ।। सम्भो।।

कौरव खेलें पाण्डव खेलें। खेलत द्रोपदी नारी ।। सम्भो।।
तुम भी खेले हम भी खेले। खेलत सारे गॉव की नारी ।। सम्भो।।

समाप्त

होली नम्बर-51

अछहारे गिरधर राज भयो कंशासुर को। मथुरा उड गयी धूल ।। टेक।।

अछहारे गिरधर कंस पठायो अंक ुश को। बिद्रावन को जाय ।। गिरधर।।

अछहारे गिरधर गमन कियो है कन्हैया। कंस की राह घटाय ।। गिरधर।।

अछहारे गिरधर फौज चली मथुरा नगरी। घोबियन घाट लुटाय ।। गिरधर।।

अछहारे गिरधर डगर मिलि एक पनहारी। हो गई रूप निहाल ।। गिरधर।।

अछहारे गिरधर धनुष तोड क े खण्ड कियो। असुर ही मारे पॉच ।। गिरधर।।

अछहारे गिरधर सौमन मदिरा पिया धरो। आय खडो गजराज ।। गिरधर।।

अछहारे गिरधर कोप कियो है कन्हैया। सुण्ड पकडकर मार ।। गिरधर।।

अछहारे गिरधर चाण्डुक मुष्ठी महाबली। उनसे युद्ध मचाय ।। गिरधर।।

अछहारे गिरधर केश पकड के कंस मारो। मुख से करे पुकार ।। गिरधर।।

समाप्त

होली नम्बर-52
क ुब्जा लागी साथ री कोई गोविन्द ता े मधुवन चले।। टेक।।

चैत में टेसुवा फ ूले।।2।। अंचला लेहो रंगाय ।। री कोई।।

वैसाखे ग ुलाल फ ूले।।2।। भंवरा करे ग ुजंार ।। री कोई।।

ज ेठ में गर्मी आयी।।2।। घर-घर पंख लगाय ।। री कोई।।

आषाडे घनघोर भयो।।2।। रूम झूम बरसे मेघ ।। री कोई।।

सावन में सखि सावारो।।2।। धरती करे श्रृंगार ।। री कोई।।

चार मेघ भादों बरसे। नदी चढे असमान ।। री कोई।।

औसौजे ऋत ु आय गई।।2।। बमना न्यौती बुलाय ।। री कोई।।

कार्तिक में जुवरा खेले।।2।। घर-घर दीप जलाय ।। री कोई।।

मगसरि में बाटो छायो।।2।। गोरी करे ऋंगार ।। री कोई।।

पूस में जाडो होवे।।2।। घर-घर धूनी रमाय ।। री कोई।।

माघ में परवी आई।।2।। कर ग ंगा स्नान ।। री कोई।।
फाग ुन में होली आयी।।2।। घर-घर रंग बनाय ।। री कोई।।

समाप्त

होली नम्बर-53

ऋषि गौतम की नारी अहिल्या। राम चरण से मुक्त हुई।। टेक।।

काहे कारण शीला भई है। सुनलो ध्यान लगाय ।। अहिल्या।।
एक दिन सूर्य से पूछे सुरपति। इन्द्र को रवि समझाय ।। अहिल्या।।
मेरो तेज बड़ो भारी। शशि को पूछो जाय ।। अहिल्या।।
चल गया इन्द्र चन्दा क े पासा। अहिल्या नारी बताय ।। अहिल्या।।

भोग करन को इन्द्र की इच्छा। तब शशि कपट चलाय ।। अहिल्या।।

आधी रात में कपट चलायो। गौतम द्वारे जाय ।। अहिल्या।।

कपटी बोल सुने ऋषि गौतम। चन्दा को निन्दा जाय ।। अहिल्या।।

लोटा धोती हाथ पकड़ के। नहाने गंगा जाय ।। अहिल्या।।

आधी रात में नंगी ग ंगा। ऋषि को सब समझाय ।। अहिल्या।।

लौटे ऋषि जब घर में आये। दुनियां चन्द को देखा ।। अहिल्या।।
इन्द को भग में श्रापही दीनू। नारी पत्थर होय ।। अहिल्या।।

समाप्त

होली नम्बर-54

नित यमुना क े तीर खेलें कन्हैया। नित यमुना क े तीर खेलें कन्हैया।

बालो-बालो कन्हैया जानकी। सखि मुरलिया ले गये छीन ।। बा0सु0सां0।।
काहे की तेरी बंसुरी कन्हैया बांसुरिया सुन सांवरिया। काहे को तेरो बेन ।। खेलें कन्हैया।।
हरे-हरे बांस की बसुरी कन्हैया बा0सु0सा ं0। लोहे को तेरो बेन ।। खेलें कन्हैया।।

क ै मोले तेरी बांसुरी कन्हैया बा0स ु0सां0। क ै मोले तेरो बेन ।। खेलें कन्हैया।।

लाख टका की बांसुरी कन्हैया बा0सु0सा ं0। अनमोले तेरो बेन ।। खेलें कन्हैया।।

कौन बजावे बंसुरी कन्हैया बा0सु0सां0। कौन बजावे बेन ।। खेलें कन्हैया।।

क ृष्ण बजावे बंसुरी कन्हैया बा0सु0सां0। राधा बजावे बेन ।। खेलें कन्हैया।।

क ै सुर बाजो बांसुरी कन्हैया बां0सु0सा ं0। क ै सुर बाज े बेन ।। खेलें कन्हैया।।

छः सुर बाजो बंसुरी कन्हैया बां0स ु0सां0। नौ सुर बाजो बेन ।। खेलें कन्हैया।।

क ै वन बाजो बंसुरी कन्हैया बां0सु0सां0। क ै वन बाजो बेन ।। खेलें कन्हैया।।

मधुवन बाजो बंसुरी कन्हैया बां0सु0सा ं0। क ंुजवन बाजो बेन ।। खेलें कन्हैया।।

कौन बनावे बंसुरी कन्हैया बां0सु0सां0। कौन बनावे बेन ।। खेलें कन्हैया।।

बढ़ई बनावे बंसुरी कन्हैया बां0सु0सा ं0। कारीगर बनावे बेन ।। खेलें कन्हैया।।

समाप्त

हा ेली नम्बर-55
तुम तो भई अवतार कालिका। कलयुग में अवतार भई।। टेक।।

पिडली माटी गो को गोबर। चौका देह पुराय ।। कालिका।।

अक्षत चन्दन बेल की पाती। पूजा देत बनाय ।। कालिका।।

धूप कपूर की बाती बनी है। जगमग जगमग होय ।। कालिका।।

क ंचन थाल में फ ूल मिठाई। दर्शन दे महामाई ।। कालिका।।
पीपल द्वारे सोहे तेरे। बड़ सोहे पिछवाड़ ।। कालिका।।
सोने की छत्ता भवन बिराज े। घण्टा देय बजाय ।। कालिका।।

समाप्त

होली नम्बर-56
अंचला मेरो छोड़ श्याम तेरी गहू चली बिन्द्रावन को।। टेक।।

एक वन से चन्द्रावली निकसी। एक वन नटवर गिरधारी ।। तेरी गहू।।

अॅचला पकडे बय्यां मरोडे। बात करे सब छलकारी ।। तेरी गहू।।

पंय्या पडत हॅ ू अरज करत हूॅ। आंचल पकडे बनवारी ।। तेरी गहू।।

भोर भयी चलि आयी हॅ ू वन में। सास हमारी दे गाली ।। तेरी गहू।।

जाय यशोदा से हम बोले। सुन हम कै देगी गारी ।। तेरी गहू।।

कहॉ क े तुम ग्वाल गुजरिया। कहॉ तुम्हारो बल भाई ।। तेरी गहू।।

अब तुम मुझ पर दया करो हे। सबके हो तुम भय टारी ।। तेरी गहू।।

समाप्त

होली नम्बर-57

धन कलयुग महराज पुरूष जी। जब तुमने लीला दिखाई है।। टेक।।

उल्टा राज करे राजा। उल्टी रीत सिखाय ।। पुरूष जी।।

ब्राह्मण होक े वेद ना जाने। क्षत्रीय शीश नवाय ।। पुरूष जी।।

वेश्य क े घर में तुलसी पूजा। शूद्र ने राज चलाय ।। पुरूष जी।।

धोबी क े घर में गाय बधेगी। ब्राह्मण संध्या क्या है ।। पुरूष जी।।
जोगी होके मदीरा पीवे। सिर के केश बढाय ।। पुरूष जी।।

ऊंच नीच का भेद मिटावे। जातीय देह बनाय ।। पुरूष जी।।

विष्णु का नाम जपा ना किसी ने। बोली ज ै हिन्द चलाय ।। पुरूष जी।।

धरम करम सब छोड दिया है। बोतल मुंह में लगाय ।। पुरूष जी।।

समाप्त

होली नम्बर- 58
हाथ लिये चन्दन लकडी। यशोदा तेरो बालो बड़ो झगडी।।टेक।।

घाट ही बाट में ठाडो रहत है। पनियां भरन गयी वां पकडी ।। यशोदा।।

बाहर भीतर देखन लागी। चक्की पीसन गयो वॉं पकडी ।। यशोदा।।

आंगन तीर में बैठी रहो है। दूध दुहन गयो वां पकडी ।। यशोदा।।

नन्द महर घर बैठो रहो है। गोठ गाडन गयो वां पकडी ।। यशोदा।।

बिन्द ्रावन में धेन ू चुगावे। घास काटन गयो वां पकडी ।। यशोदा।।
मेरी तरफ को आंख मिलावे। झटपट छतिया दे छतिया मरोडी ।। यशोदा।।

सब सखियां मिल संग चलत हैं। बय्ंया पकडकर दे रघोडी ।। यशोदा।।

समाप्त

होली नम्बर-59
यमुना कालो नाग बहु। पानी को अकेली ना जय्यो।।टेक।।

यमुना कालो नाग बुरो है। देखी जिया डर जाय ।। बहु।।

आवत-जावत मारत डुबकी। पनियां भर नन देय ।। बहु।।

नदिया तिर को महल भयो है। बैरी तिर को बास ।। बहु।।

सब दिन की में पनियां जाऊं। एक दिन होय विनास ।। बहु।।
अपने सुत की शादी करले। मत कर मेरी आस ।। बहु।।

एक मेरे मन ऐसी आयी। मैंक े को चलि जाय ।। बहु।।

तेरे मैंक े में मल्हा हो तो। नाग ही दे मरवाय ।। बहु।।

समाप्त

होली नम्बर-60
गाडो दीजो मोर छयलवा। तेरी बल ल्यूं रंग रे जा से।।टेक।।
गजभर चुनर रंग लेलो। रंग रेजा से ।। गाड़ों दीजो।।
पूरब बादल उनानू रंग रेजा से। पश्चिम भयो घन घोर ।। छयलुवा।।

कालो बादल उनानू रंग रेजा से। क ैलो बरष निहार ।। छयलुवा।।

उत जन बरसे मेघूला रंग रे जा से। जिते पिया परदेश ।। छयलुवा।।

मेरी जो भीगे सिर स्यूनी रंग रेजा से। छॉह पिया की पाग ।। छयलुवा।।

काहे को कागज कारूं रंग रे जा से। काहे को यो स्याही ।। छयलुवा।।

फाड़ि अंचला कागज कारू रंग रे जा से। पोछि कजरे की स्याही ।। छयलुवा।।

कौन पंडित पाठिय लेखे रंग रे जा से। कौन सन्देश ले जाय ।। छयलुवा।।

सुवा पंड़ित पातिय लेखे रंग रे जा से। काग सन्देश ले जाय ।। छयलुवा।।

कि मेरे पिया को आवानू रंग रे जा से। दॉनू जो बोले फाग ।। छयलुवा।।

समाप्त

हा ेली नम्बर-61

लगी-लगी पिरित कैसे तोडी। तुम बोलो क्या ें ना सुन्दर गोरी।। टेक।।
हमसे तोडी किस संग जोडी। जोड़ि केहि कारण तोडी ।। तुम।।

अरज करत हूॅ पंय्या पड़त हूॅ। पूछत हूॅ मैं कर जोरी ।। तुम।।

अब हंसकर मोहे नैन मिलादे। मानो विनती यह मोरी ।। तुम।।

तुम बिन और न न्यारी मेरी। दिल में धीरज धर लो री ।। तुम।।

काटो कलेजा भूमि धरत हूॅं। त्वे परतित नहीं थोरी ।। तुम।।

समाप्त

होली नम्बर-62
तै मेरी चीर चुराय कान्हा जोवन लूटो मधुवन में।। टेक।।

एक समय ब्रज की सब सखियां। करन चली स्नान ।। कान्हां।।

चीर उतारे जमुना तट में। ले गयो नन्द क ुमार ।। कान्हां।।

सब सखियां तट में आयी। चीर नजर नहीें आय ।। कान्हां।।

तबही चौक उठी सब सखियां। मुरली की ध्वनी आय ।। कान्हां।।

हाथ ही जोडक े अरज करत हॅू। चीर हमारी देय ।। कान्हां।।

चीर तुम्हें हम तबही देंग े। जल से बाहर आय ।। कान्हां।।

जल से बाहर सखियां आयी। सबको दे समुझाई ।। कान्हां।।

समाप्त

होली नम्बर- 63

ठाडी जो हेरू बाट मेरो संय्या निर्मो ही कब आवे मन करे विचार।। टेक।।
सोना खरीदने पिया चले।।2।। सात समुन्द्र पार ।। मेरो।।

बालेपन अब तरूण भई।।2।। जोवन है भरपूर ।। मेरो।।

कौन पण्डित पातिय लेखे। कौन संद ेश ले जाय ।। मेरो।।

सुवा पंडित पातिय लेखे।।2।। काग सन्देश ले जाय ।। मेरो।।

काहे को कागज कारू।।2।। काहे को यो स्याही ।। मेरो।।
फाडि अॅचला कागज कारू।।2।। पोछि कजरे की स्याही ।। मेरो।।
पूरब बादल उनानू।।2।। पश्चिम भयो घनघोर ।। मेरो।।

कालो बादल उनानू।।2।। कैलो बरसन हार ।। मेरो।।

उतजन बरसे मेघूला।।2।। जितै पिया परदेश ।। मेरो।।
की मेरे पिया को आवानू।।2।। दांनू जो बोले काग ।। मेरो।।

समाप्त

हा ेली नम्बर-64

सांवरी रंग डारो भिगावन को।।2।। है जो है जो लडका खिलावन को।। टेक।।
गावो खेलो देहो आशीषा। तुम हम जी रूंला लाख बरिषा।। घर-2 रंग बनावन को ।। सांवरी।।
गा0खे0दे0आ0। गों को सजन जी र लाख बरिशा।। कुल की रीति सिखावन को ।। सांवरी।।
गा0खे0दे0आ0। इज बाज्यू जी रौला लाख बरिशा।। भलि-2 बात सिखावन को गावो खेलो देहो
आशीषा।
गा0खे0दे0आ0। भाइयों की जोडी जी र लाख बरिशा।। हंसि-2 खेल खिलावन को।। सांवरी।।
गा0खे0दे0आ0। गान्या बज्यूना जी र लाख बशिषा।। युग-2 होली खिलावन को।। संावरी।।

समाप्त

होली नम्बर- 65

होली खेलत ऐड़ी फटक शीला। होली खेलत ऐड़ी फटक शीला।। टेक।।
कहॉ वास कियो ऐड़ी ने। कहॉं इनको अजब किला ।। होली।।

ऐड़ी धार में वास लियो है। ब्यानधुरा में अजब शिला ।। होली।।

धूरी धर्याप में करी है तपस्या। गौतोडा चौघान मिला ।। होली।।

समाप्त

होली नम्बर- 66
क ुरूक्षेत्र होत लड़ाई। मुरलीधर हैं पाण्डव दल में।। टेक।।

भीष्म पितामह पिता उन्हीं क े। उनमें भई है लड़ाई ।। मुरली।।

ज ुआ खेलन में रार पड़ी है। पाण्ड़व को दल हारी ।। मुरली।।
द्रोणाचार्य बाक े बीच पड़े हैं। दानों दल हारी ।। मुरली।।

छत्रपति दुर्यो धन राजा। मन चाह े सो कीन्ही ।। मुरली।।

बीच सभा में द्रोपदी रानी। लाज दशासन लेई ।। मुरली।।

हा प्रभु दीन दयाल ु दयानिधि। क ेही अपराध भुलाई ।। मुरली।।

द्रोपदी जी ने सुमिरन कीनो। चीर बड़ावर्न आइ  ।। मुरली।।

खेंचत-खेंचत भुजबल हारे। तब लग पार न पाई ।। मुरली।।

पॉचों पाण्ड़व वन गये हैं। संग में द्रोपदी रानी ।। मुरली।।

बारह वरष वन खण्ड़ में बीते। एक वरष अब बाकी ।। मुरली।।

राजा युधिष्ठर पूछन लागे। अब क्या करना बाकी ।। मुरली।।

समाप्त

होली नम्बर -67

भज ु रघुवर श्याम युगल चरणा राधे घनश्याम युगल चरणा।
इतही अयोध्या निरमल सरयू। उत शीतल ग ंगा यमुना ।। राधे।।
इत कौशल्या गोद खिलावे। उत यशोदा झूले पलना ।। ।। राधे।।
इत शंकर को चाप उठायो। उत गिरिवर नख पर धरना ।। राधे।।
इत में बाण धनुष कर राज े। उत मुरली मुख पर धरना ।। राधे।।
इत में सीता संग बिराज े। उत राधे संग कियो रमना ।। राधे।।
इत रावण क े मस्तक छेदे। उत क ंस बहायो जा जमुना ।। राधे।।
इत तुलसी उत सूर कहत है। गावे भव सागर तरना ।। राधे।।

समाप्त

होली नम्बर -68

चरण छूअत दुख दूर हरे। प्यारे भज प्रभु कौशल नाथ हरे ।। टेक।।
चरण धरे प्रभु वन विचमुनि संग। मुनियों को यज्ञ सफल कियो ।। प्यारे।।
चरण धरे प्रभु मिथिलापुर में। कठिन धनुष को खण्ड किये ।। राधे।।
चरण धरे शिला पत्थर मंे। नारी अहिल्या मुक्त कियो ।। राधे।।
चरण धरे प्रभु पंपापुर में। बाली दुष्ट को मार दियो ।। राधे।।

चरण धरे प्रभु लंका नगरी। रावण भुज के खण्ड कियो ।। राधे।।
चरण धरे जहां-2 प्रभु जी ने। दुख निवारण सबको कियो ।। राधे।।

समाप्त

होली नम्बर -69
बलि छलन चले त्रिलोक नाथ पाताल पुरि को गमन कियो।
बलि राजा ने यज्ञ रचो है। द्वार खड ें हो जाय ।। नाथ ।।
तेरे द्वारे बिप्र खड ़ो है। क्या आज्ञा हो जाय ।। नाथ ।।
जो कुछ मांगन मांगिले विप्रा। जो मन इच्छा होय ।। नाथ ।।
एक वचन ले दोई वचन ले। तिनही वचना ले ।। नाथ ।।
वचन टरे राजा नरक जावे। धरती तीन पग जाय ।। नाथ ।।
संकल्प देने में जल को छोड़ा। रोकन शुक ्र लगाय ।। नाथ ।।
क ूसा की एक चाप बनाई। सूखन पे मरि जाय ।। नाथ ।।
एक चरण से धरती नापी। दूज े स्वर्ग  में जाय ।। नाथ ।।
तीजो चरण कहां धरू राजा। अपने सिर में रखाय ।। नाथ ।।
ध्यान लगाकर सुनलो होली। बलि पाताल पठाय ।। नाथ ।।

समाप्त

होली नम्बर-70
उधो-उधो सुरतिया श्याम की दिल बाहर कहीं नहीं जाती है।। टेक।।
काले बाल बने घुंघराले। हाथ मुरलिया बॉस की ।। दिल।।
मोर मुक ुट माथे पर साहे। कानन क ुण्डल लाल की ।। दिल।।
छवि अति सुन्दर माला छाजे। गल बैजन्ती माल की ।। दिल।।
यमुना क े निर तिर धेनू चुगावे। ओढी कमलिया काली कि ।। दिल।।
धन्य यशोदा भाग तुम्हारो। जिन हरि गोद खिलाय ।। दिल।।

समाप्त

होली नम्बर -71

मत पकड़ो चीर असुर मेरी मत पकड़ो हो। मत पकड़ो चीर असुर मेरी मत पकड़ो हो।। टेक।।
तुमता े मेरे ज ेठ लगत हो। मैं हूॅ असुर बहु तेरी ।। मत ।।
कौन बलि की नारी कहावे। कौन बलि देवर तेरो ।। मत ।।
अर्ज ुन बलि की नारी कहावे। भीम बलि देवर मेरो ।। मत ।।

कहॉं तेरो भीम कहॉ ं तेरो अर्ज ुन। कहॉ तेरो कृष्ण दहि चोर ।। मत ।।
दुष्ट द ुशाशन चीर को खींचे। राखो लाज हरि मेरी ।। मत ।।
खेंचत चीर दुशाशन हारे। सहसर चीर मिले गोपी ।। मत ।।

समाप्त

होली नम्बर -72

लंका होत लडाई रावण है मतवालांे ।। लंका होत लडाई रावण है मतवालांे ।। टेक।।
कहत मन्दोदरी सुन प्रिया रावण। छोड़ो सब चतुराई ।। रावण।।
जिनकी तिरिया तुम हर लाये। ओ त्रिलोकी नाथ ।। रावण।।
हनुमन्त ज ैसे पायक जिनक े। संग लछिमन राम ।। रावण।।
सिर पर काल चढो निसिचर क े। मानत समझत नाहीं ।। रावण।।
जो सागर को गर्भ करत है। उसमें सेतु बंधाय ।। रावण।।
असुर निसाचर मारे रण मे ं। चेत पिया को नाही ।। रावण।।
जात की त्रिया बुद्ध ु की ओछी। उनकी करत बढाय ।। रावण।।
लंका जैसी कटि हमारी। समुन्द्र ज ैसी खाप ।। रावण।।
मेघनाद से पुत्र हमारे। कुम्भकरण बल भाई ।। रावण।।
चन्द्र सूरज से दीपक हमारे। इन्द्र टहलवा होय ।। रावण।।
राम लछिमन वन क े वासी। क्षण में पकड़ी भगाय ।। रावण।।

समाप्त

होली नम्बर- 73

पतली कमर लम्ब केश सुगड़ जल भरन चली पनघट पर हो।। टेक।।
स्योदिया त ेरी अजब रशीली। ड़डिया खूब सुहाय ।। सुगड।।
कपलिया तेरी अजब रशीली। बिंदिया खूब सुहाय ।। सुगड।।
अखियां तेरी अजब रसीली। कजरा खूब सुहाय ।। सुगड।।
नकिया तेरी खूब रसीली। बेसना खूब सुहाय ।। सुगड।।
गलिया तेरी अजब रसीली। हंसियां खूब सुहाय ।। सुगड।।
छतिया तेरी अजब रसीली। अंगियां खूब सुहाय ।। सुगड़।।
ज ंगियां तेरी अजब रसीली। लहंगा खूब सुहाय ।। सुगड़।।

समाप्त

होली नम्बर-74

करिले आपनू ब्याह देवर हमरो भरोशो जन करिय।। टेक।।

अछहारे देवर हमने बुलाव े अक ेली। तुम लाये संग चार ।। देवर।।
अछहारे देवर हमने बुलाये सांझा में। तू आये आधी रात ।। देवर।।
अछहारे देवर हमने मंगाई अंगिया। तू लाये व्यसनार ।। देवर।।
अछहारे देवर हमने पढाये दो दिन को। तोहि लागे दिन चार ।। देवर।।

समाप्त

होली नम्बर -75

ओ झूकी ओ मोरे यार जानम नैना तोरे न ैना बने मिसरी क े कुन्ज े झूरि-2 मरत गवार।। टेक।।
कौन दिशा से बिजली आयी। कौन दिशा रमी जाय ।। जालम ।।
पूरब दिशा से बिजली आई। पश्चिम दिशा रमी जाय ।। जालम ।।
इस बिजली में क्या-क्या हेरे। नींबू नारंगी अनार ।। जालम ।।
इस बिजली में क्या-क्या हैरे। जोरू खसम दोनों यार ।। जालम ।।
ये अंगिया मेरे मायक े से आयी। दे पठई मेरे यार ।। जालम ।।
इस अंगिया में गोट लग े हैं। हीरा लगे जालिदार ।। जालम ।।

समाप्त

होली नम्बर -76

जल कैसे भरू यमुना गहरी। जल कैसे भरू यमुना गहरी।। टेक।।
सास ननद से छिपकर आयी। सेज पिया की ना ठहरी ।। जल।।
चलत-चलत आई यमुना में। हाथ घड़ा सिर पै गगरी ।। जल।।
ठाड़े भरू ं ब्रज राज देखें हैं। न्यूडी भरू भीग े चुनरी ।। जल।।
न्यूडी भरू मोहे लाज लगत है। बैठी भरू भीगे सगरी ।। जल।।
होत विलम्ब पहर दिन बितो। सासू ननद देखें सगरी ।। जल।।
जो यमुना तट बैठी बिताउ। लागत श्याम यहॉ ं ठहरी ।। जल।।

समाप्त

होली नम्बर-77

सीता खोजन जाय पवनसुत हाथ मुदडिया ले कर के।। टेक।।
सीता खोजन हनुमन्त चलिये। राम की आज्ञा पाय ।। पवनसुत।।
अंग ूठी ले गयो राम चन्द्र की। दौडी चलियो जाय ।। पवनसुत।।
चलियो पवनसुत गढ लंका को। अंजनी सुत लेक े धाम ।। पवनसुत।।
अस्सी कोस लंका में जावे। गलि-2 सोद लगाय ।। पवनसुत।।
खोजत-खोजत जाय मिलो है। सीता महल में जाय ।। पवनसुत।।

अंग ूठी पकड़ के सीता पे ड़ाली। जानकी सोद लगाय ।। पवनसुत।।
वृक्ष से हनुमत क ूदन लागे। सीता गोद में जाय ।। पवनसुत।।
सात दिनन को भूखो प्यासो। क ुछ खाने को देय ।। पवनसुत।।
बाग बगीचे बहुत मिले हैं। चैन से फल को खाय ।। पवनसुत।।स
सीता ने जब आज्ञा दीनी। फल को तोडी जाय ।। पवनसुत।।

समाप्त

होली नम्बर-78

ग ंगा निरमल धार भगीरथ पाप कटन को हरिद्वारा ।। टेक।।
चल स्नान भगीरथ कीनू। गंगा स्वर्ग  की धार ।। भगीरथ।।
जनम-जनम के पाप कटेंग े। पाप नासन की टार ।। भगीरथ।।
माता ग ंगा में तेरी शरणा। दुनियां की है धार ।। भगीरथ।।
पाप कटेंग े नामहि लेते। तू है एक आधार ।। भगीरथ।।
नगत है सौदा उधार नहीं है। अब क्यों हो बेकार ।। भगीरथ।।
शिवजी कहत है इक मनचित से। गंगा करके स्नान ।। भगीरथ।।

समाप्त

झ ुमटा 1⁄4भीन1⁄2 -1

भैंसिया को घॅंाडो बाजानि धुरा में। भैंसिया को घॅंाडो बाजानि धुरा में।।टेक।।
सीता को ब्याह हूछो जनकपुर में। सीता को ब्याह हूछो जनकपुर में।।
खेड़ा में को साजी किशनापुर में।।2।। बड़ा-2 योद्धा जनकपुर में ।। भैंसिया।।

दातुली त भ ुली ग ेहॅू का क ुरा में।।2।। रावण झा योद्धा जनकपुर में ।। भैंसिया।।

चीरन लकडी मालदार को घना।।2।। जनक की चिठ्ठी दशरथ खन ।। भैंसिया।।

गीत लेखी लीना अपना सुर में।।2।। राम लछि गया जनक पुरा में ।। भैंसिया।।

लीसो लगा लिया बिंदुली चुरा में। शिव को धनुष जनकपुर में ।। भैंसिया।।

शिव को दिवाल लधौन धुरा में।।2।। ज ैका क ै टुट लो जनकपुर में ।। भैंसिया।।

शेर की गुंजार मोरनौला धुरा में।।2।। सीता को ब्याह हंुछ जनकपुर में ।। भैंसिया।।

डोंडियाल का भैंसा डुडोली धुरा में।।2।। बडी भीड़ पडी जनकपुर में ।। भैंसिया।।

सेना की अम्बारी जनकपुर में। हाथी में छाजिछ जनकपुर में ।। भैंसिया।।

समाप्त

झुमटा 1⁄4भीन1⁄2 -2
बंसी शब्द सुनादे कन्हैया। बंसी शब्द ।।टेक।।

काहे की तेरी बंसुरी कन्हैया बंसी शब्द। काहे को तेरो बेन राधा ज्यु ।। बंसी शब्द।।

हरी-हरी बांस की बंसुरी कन्हैया बंसी शब्द। लोहे को तेरो बेन राधा ज्यु।। बंसी शब्द।।
क ै सुर बाज े बंसुरी कन्हैया बंसी शब्द। क ै सुर बाज े बेन राधा ज्यु ।। बंसी शब्द।।

छः सुर बाज े बंसुरी कन्हैया बंसी शब्दा। नौ सुर बाज े बेन राधा ज्यु ।। बंसी शब्द।।

क ै मोल तेरी बांसुरी कन्हैया बंसी शब्दा। क ै मोल तेरो बेन राधा ज्यु ।। बंसी शब्द।।

लाख टका की बंसुरी कन्हैया बंसी शब्दा। अनमोल तेरो बेन राधा ज्यु ।। बंसी शब्द।।

समाप्त

झ ुमटा 1⁄4भीन1⁄2 -3

क्वे पढ़नी भागवत क्वे पढ़नी गीता। चौदह वरष बन राम लछि सीता।। टेक।।

क्वे गाड़नी पाट उदाल क्वे गाड़नी सन। धरम प्रतिज्ञा राखो राजा हरिश्चन्द्र।।

लानी भैंसी बता ग ैछ बाकुडी ना सूनी। स्वपच चंड़ाल घर कर लै उघौनी।।

वल्ली नदी पल्ली नदी लटकनी सौरा। मरघट ड्यूटी मजा रात दिन पहर ।।

लमगड़ स्याल रूनी मोरनौल शेर। मरघट कर लिनि सबै थे बेर।।

फ ूली गयो दया हो रामा फुली गयो दया। एक चेलो राजा ज्यु को मरि जब गयो ।।

काटी हालो खिनू हो रामा काटी हालो खिनू। मरियो पुतर हो राजा फ ुकन ना दिनू ।।
गोरू बाछा गौडी माजा बौडी लै धुकली। मरघट कर देली तब तै फ ुकली।।
धरती में रवि छाज रवि लै बादल। क्या करछी रानी ह फिरी साड़ी लै फाड़छी ।।

तमाख को हुक हो रामा तमाख को हुक। मरघट कर देली तब चेलो फ ुक ।।
लुवा लाख खाय हो रामा लुवा लाख खाय। धर्मात्मा हरिश्चन्द्र यश पायी गयो ।। टेक।।

रात दिन पड़ी रू ंछी दार की सराई। आफू लग ै तरी राजा काशी लै तराई ।। क्वे पढनी।

समाप्त

झुमटा 1⁄4भीन1⁄2 -4

राधिका रि रूमझुमा बरसन लागो राधिका। राधिकारि वृन्दावन रंग मेरी राधिका।। टेक।।
राधिका रि कृष्ण की बंसुरी बाजी राधिका। राधिका रि गोपिना संग मेरी राधिका ।। राधिकारी।।
राधिकारी रि मोहन मतवालो मेरो राधिका। राधिका रि यमुना का तट मेरी राधिका ।। राधिकारी।।
राधिका रि गोरूना का ग्वाला मेरी राधिका। राधिकारि बडो नट-खट मेरी राधिका ।। राधिकारी।।
राधिका रि सूरज ै का पाया मेरी राधिका। राधिका रि दिना जानि रैया मेरी राधिका ।। राधिकारी।।
राधिका रि मैं माया मैं माया कौनी राधिका। राधिका रि बॉंकी क्वे निरैया मेरी राधिका ।।
राधिकारी।।
राधिका रि पहाड़ में बर्फ पड़ो राधिका। राधिका रि भावर में घाम मेरी राधिका ।। राधिकारी।।
राधिका रि बुट दार पिछौडी तेरी राधिका। राधिका रि जप लिया कृष्ण नाम राधिका ।। राधिकारी।।
राधिका रि रंगीली छ काली क ुंमाउ राधिका। राधिका रि सैनी छ सोर मेरी राधिका ।। राधिकारी।।
राधिका रि खिल खिल हंसनु तेरो राधिका। राधिका रि नाची जानी मोर मेरी राधिका ।।
राधिकारी।। समाप्त

झुमटा 1⁄4भीन1⁄2 -5

यमुना किनारा बेन बाजछी। हिट उठ सखी सांझ है जॉझी ।। टेक।।

वृन्दावन में कोयल बासैछी। सब गोपिना को मन रिझौछी ।। यमुना।।

ओली पली गोपी घेर बॉधछी। बिच क ृष्ण संग राधा नाचछी ।। यमुना।।

हॅ ंसि-हॅसि राधा नैन नचौछी। क ृष्ण ज्यु का दिल चोट लागछी ।। यमुना।।

जति क ृष्ण ज्यु की बंसी बाजछी। उती राधा दिल चोट लागछी ।। यमुना।।

हॅसी-हॅसी राधा बीन बजौछी। क ृष्ण ज्यु का संग नाच नाचछी ।। यमुना।।

जति गोपिवन रास रचौंछी। उति क ृष्ण संग राधा नाचछी ।। यमुना।।

धन-धन गोपी रास रचैंछी। मोहन का संग सब नाचैछी ।। यमुना।।

समाप्त

झुमटा 1⁄4भीन1⁄2 -6

बिना कसुर का बन छाड़ि गया म्यार देवर। मैं छू वाल्मिकी मुनी देवी फीकर ना कर।।टेक।।

हल्द्वानी को हल्द रूख छोड़ि गया म्यार देवर। बांदर रूख्याल बन छोड़ि गया म्यार देवर।।

राम ज्यू कि रानी बन छोड़ि गया म्यार देवर। करम दुख्याल बन छोड़ि गया म्यार देवर।।

खमरै की खाई बन छोड़ि गया म्यार देवर। लै हन दयाल धोली देवी फिकर न कर।।

अल्मोड़ा की नन्दा माई देवी फिकर ना कर। बाक ुरा की सॉकि वन देवी फिकर न कर।।

त्यारा दुख देखी बन देवी फिकर ना कर। मैं दुख छ बॉकि बन देवी फिकर ना कर।।
अस्कोटा का पानी नौला छोड़ि गया म्यार देवर। रूमाल भिगायो बन छोडि गया म्यार देवर।।

यो पापी कलेजी बन छोडि गया म्यार देवर। र्वै आंसू बगायो बन छोडि गया म्यार देवर।।

काटि हालो खिनू बन देवी फिकर न कर। करम की बलहारि बन छोडि गया म्यार देवर।।

न मानिये घिनु बन छोडि गया म्यार देवर। डोट्याल ै कि ड्योटी कि टोपी छोडि गया म्यार

देवर
गोरख्यों की बुली-बुली बन छोडि गया म्यार देवर। मेरी कुटिया भेंट हिट देवी फिकर न कर।।

समाप्त

झुमटा 1⁄4भीन1⁄2 -7
नैनीताल द्यो लागि रौ नन्दा। भीमताल स्यौ पाकि रौ ला ।।
मोहन लौंडा नौला सिपाई। गोरूना ग्वाला लागिरौ ला।।
बॉज का बजानि धुरा गोरूना ग्वाला लागि रौ ला। बांसुरी का वन मोहना ग्वाला लागिरौ ला।।
फौज की कठिन ड्यटी गोरूना ग्वाला लागिरौ ला। नी लागनू मन मोहन गोरूना ग्वाला लागिरौ ला।।
क ृष्ण ज्यू की बंसी नन्दा भीमताल स्या ै पाकि र लौ। राधा ज्यू की बेन नन्दा भीमताल स्यौ पाकि र लौ।
यमुना का तट में नन्दा भीमताल स्यौ पाकि र लौ। गोपिना समेत नन्दा भीमताल स्या ै पाकि र लौ।
सिकी बाटौ हेड़ि मोहना गोरूना ग्वाला लागि र ला। सब लोगों को भले करिया गोरूना ग्वाला लागिरौ
ला।।
हमरा गौं का ऐड़ी मोहन गोरूना ग्वाला लागिरौ ला। काटि हालो खिनु हो नन्दा भीमताल स्यो पाकि र
ला।।
बोलि में बुलान ु हुॅच भीमताल स्यौ पाकि र ला। जन मानिया घिनु नन्दा भीमताल स्यौ पाकि र ला।।
फाग ुन रंग्याली चोली गोरूना ग्वाला लागि र ला। पिछौडी पियारी मोहन गोरूना ग्वाला लागिरौ ला।।
बचि रया भेंट होली गोरूना ग्वाला लागिरौ ला। फिरि खेलैला होली गोरूना ग्वाला लागिरौ ला।।

झ ुमटा 1⁄4भीन1⁄2 -8

गदुआ छाजो बाग बगीच रंगीलो बाट। काक ुड़ी छाज रेंत वे म्यार मैत गोरि कालि को बाट।।
तू त क ूंछी फागुन में रंगिलो बाट। होली लागछी चैत वे म्यार मैत गोरि कालि को बाट।।

आ बैठो तम्बाक ू पीजा रंगीलो बाट। धार में की कुड़ी छ ला म्यार मैत गोरि कालि को बाट।।
बेडू पाकनी बार मास रंगीलो बाट। काफल पाक चैत वे म्यार मैत गोरि कालि को बाट।।
अल्मोडा की लाल बजार रंगीलो बाट। लाल माट की सीढी वे म्यार मैत गोरि कालि को बाट।।
चम्पावत गोलज्यु थान रंगीलो बाटो। नैनीताल नन्दा द ेवी म्यार मैत गोरि कालि को बाट।।
हल्द्वानी को हल्दू रूखो रंगीलो बाट। अस्कोट पानी नौल वे म्यार मैत गोरि कालि को बाट।।
लमगड़ा में स्याल रूनी रंगीलो बाट। मोरनौला शेर वे म्यार मैत गोरि कालि को बाट।।
लानी भैंस थाकी ग ै छ रंगीलो बाट। बाकुड़ि ना सूनी वे म्यार मैत गोरि कालि को बाट।।
धरती में रवि छाज रंगीलो बाट। रवि लै बादल वे म्यार मैत गोरि कालि को बाट।।
डोटी में डुट्याल रूनी रंगीलो बाट। गोरखा गोरख्याल वे म्यार मैत गोरि कालि को बाट।।

समाप्त

झ ुमटा 1⁄4भीन1⁄2 -9

राम रसीला श्याम सुन्दर श्रुतिसार र्तुइ  छ ला। ओली धार की पली कगर बंसी बज ून्य तुई छ ला।।
तुई छै राम तुई छै श्याम सुरति सार त ुई छ ला।।
मथुरा में जन्म लीबे गोकुल में तुई छै ला। देवकी है जन्म लीबे यशोदा लाल तूई छ ला।।
या देखछुं वा देखछुं जां देखछुं त ुई छ ला। यमुना का निर तिर गय्या ग्वाल तुई छ ला।।
बाट घाट में दै की ठेकी, ठेकी फोडन्या तुई छ ला। वृन्दावन क ुंज गलिन दै चोरन्य र्तुइ  छ ला।।
यमुना में कालो नाग नाग नाथौन्या र्तुइ  छ ला। कदम का पेड़ बीच चीर चोरन्या त ुई छ ला ।।
ओलि पलि गोपि संग घेर बादन्या त ुई छ ला। सोलह सौ गोपिन्य संग रास रचौन्य र्तुइ  छ ला।।
अत्याचारी क ंस राजा वध करन्य तुई छ ला। मथुरा की सारी जनों को भलु करन्य तुई छ ला।।
बीच सभा में द्रापदी की लाज बचुन्य र्तूइ  छ ला। कुरूक्षेत्र रण भूमि में गीता सुनुन्य र्तुइ  छ ला।।

समाप्त

Tuesday, July 16, 2019

Random




हम तुम 👫 हमसफ़र

हम तुम 👫
हमसफ़र

हर तरफ़
हर डगर 🛣
============


धूप हो 
या छांव  हो

साँझ हो
या हो सहर 🌅
==============
कितनी भी मुश्किलें
हों  मगर

साथ हो तुम
हमसफ़र 🙋🏼‍♀🙎🏻‍♂

हर तरफ़
हर डगर 🛣
==================
ढूँढती है
तुमको ही

अब मेरी
ये नज़र 👀
=============
हर  घड़ी
और हर पहर 🌗

सुन मेरे ओ
हमसफ़र

हर तरफ़
हर डगर 🛣
========
ख़ुशी तेरी😊
तेरा वख़र 😒

अब मेरा है
रहगुज़र
=========
बात का  मेरी 
यकींन कर

तू  ही मेरा
हमसफ़र 🤗

हर तरफ़
हर डगर 🛣

Friday, June 7, 2019

Life is Uncertain

Life is very uncertain,

I am not sure what will happen next ...

but trying to shift the focus on today , Although it is difficult.

All the time mind dwells in future.   tough times ahead .....

How you look at things is very important.

Let see......

Tuesday, January 31, 2017

SAP ABAP - Table Control Questions

SAP ABAP - Table Control Questions1) How to make columns fixed in table control :
2) Structure for table controls: SCXTAB_CONTROL    Type Group : CXTAB
3) how to know if screen values changed ?- SY-DATAR
4)  How to make a field disable in table control : - COL-INPUT = ' '
5) SM 50 - check current work processit can do following Tasks:
• End an ABAP program that is running.
• Debug an ABAP program that is running.
• Cancel a process (with or without core) – long running jobs
• End a session
• Activate/deactivate the restart option after an error
• Execute various functions for the process trace  DIA: Work process for executing dialog steps in user transactions.
• UPD: Update process for making U1 (time-critical) database changes.
• UP2: Update process for executing U2 (not time-critical) database changes.
• ENQ: For locking or releasing SAP lock objects.
• BTC: For processing background jobs. BDG
• SPO: For spool formatting processes.

6) SM36 and SM37 B:  - SM36 to schedule and SM37 is to monitor

7) Difference between conversion and interface ?- BDC, LSMW ---- IDOC , BAPI

8) Type Groups in SAP ABAP:- reusability.

9) Value Table and Check table:Only thing happened by specifying a Value table is: System proposes the value table name as the check table name when we try to create a foreign key relationship for the field and we can override this proposal.

10) to create your own data class:Note 515968

11) JDBG - used in SM37 to debug a background job.
6) 

SAP LOGISTICS I SAP SD | Order to Cash Cycle

 SAP LOGISTICS I SAP SD | Order to Cash Cycle

SAP SD is a key module in ERP system and is used to manage shipping, billing, selling and transportation of products and services of the organisation.


I manages Customer relationship starting from raising a quotation to sales order and billing of the product or service.

Key Components in SAP SD:
  • Customer and Vendor Data
  • Sales Support
  • Shipping of Material
  • Sales Activities
  • Billing 
  • Transportation
  • Credit Management 
  • Contract Handling and management 
  • Foreign Trade
  • Information System

SAD SD Organizational Structure :
Structure of Sales and Distribution Module

  • Sales organization - Responsible for goods and services.
  • Distribution Channel - Tells by which medium goods or services are distributed by an organization to its end users.
  • Division : Represents product or service line in a single organization. 
  • Sales Area : it comprises of sales org , distribution channel and division.
In SAP SD organizational structure, each sales organization is assigned to a company code. Then the distribution channel and divisions are assigned to sales organization and all of these comprise to make a sales area.

Sales Order

Link PointsModule Involved
Availability CheckMM
Credit CheckFI
CostingCO/MM
Tax DeterminationFI
Transfer of RequirementsPP/MM

Billing

Integration PointModule
Debit A/RFI/CO
Credit RevenueFI/CO
Updates G/l (Tax,discounts,surcharges,etc)FI/CO
Milestone BillingPS

Goods Delivery and Issue of goods

IntegrationModule
Availability CheckMM
Credit CheckFI
Reduces StockMM
Reduces InventoryFI/CO
Reduces EliminatedPP/MM

Master data in SD: 
  • Customer Master
    • Key Tables 
      Table NameKeyDescription
      KNA1KUNNRGeneral Information
      KNB1KUNNR,BUKRSCompany Code
      KNVVVKOGRG,VTWEG,SPART,KUNNRSales Area
      KNBKKUNNR,BANKS,BANKL,BANKNBank Data
      VCNUMCCINS,CCNUMCredit Card
      VCKUNCCINS,CCNUM,KUNNRCredit Card Assignment
      KNVKPARNRContact Person
      KNVPVKORG,VTWEG,SPART,PARVW,KUNNRPartner Functions
    • Key Transaction Codes :
      S.NoTransaction Codes & Description
      1
      XD01, XD02, XD03
      Used to create/change/display customer centrally
      2
      VD01,VD02,VD03
      Used to create/change/display customer sales area
      3
      FD01,FD02,FD03
      Used to create/change/display customer company code
      4
      XD04
      Display change documents
      5
      XD05
      Display change documentsUsed to block Customer − Global, order, delivery, billing, sales area, etc.
      6
      XD06
      Used for deletion
      7
      XD07
      Change Account Group
      8
      VAP1
      Create Contact Person
    • Creation of Customer Master : To create a customer master data, you need to use an Account group
      • XD01 (customer )/VD01 (Sales Area )/FD01 (Company Code):
    • Creation of Partner Function (VOPAN) : Partner function allows you to identify which functions a partner has to perform in any business process. 
    • Partner TypePartner FunctionEntry from SystemMaster Record
      Customer(CU)
      Sold-to Party(SP)
      Ship-to Party(SH)
      Bill-to Party(BP)
      Payer(PY)
      Customer numbercustomer master record
      Vendor(V)Forwarding agent(fwdg agent)Vendor numberVendor master record
      Human Resource(HR)
      Employee responsible(ER)
      Sales Personnel(SP)
      Personnel numberPersonnel master record
      Contact Person(CP)Contact Person(CP)Contact Partner number(created in customer master record,no master record of its own)
    • Create Material Stock : MB1C : Movement Type: 561 this is for Good receipts without reference.
      Movement Type: 501 − this is used for receiving goods with a Purchase Order.
SAP SD - Customer Account Groups :
GroupName
X001Domestic Customers
X002Export Customers
X003One Time Customers
Go to SPRO → SAP Reference IMG → Financial Accounting → AR and AP → Customer Accounts → Master Data → Preparations for creating customer master data → Define Account Groups with screen layout (Customers) → Execute

 :
======================================================

Pre SAles Activiteis :
  • Inquiries  : from customer : VA11 - Create Inquiry
  • Quotation :  legal document to the customer - VA21 .
Sales Order Processing in SAP SD :
  • Availability Check of the article purchased
  • Checking for incomplete data
  • Checking for pricing and taxes
  • Schedule the deliveries of goods
Creation of Sales Order :
  • Different order type available :
  • CRCredit Memo
    GKMaster Contact
    KAConsignment Pick-up
    KBConsignment fill-up
    KEConsignment issue
    FDDelivery free of charge
    CQQuantity contract
    SDSubsequent Del. Free of charge
    KRConsignment returns
    DRDebit memo request
    PVItem Proposal
    REReturns
    RKInvoice correction request
    RZReturns scheduling agreement
    SORush order
    ORStandard Order
  • There are four types of sales documents that can be defined in SAP. To define a sales docuemnt use transaction VOV8.
    1. Credit Memo (VF03)
    2. Debit Memo
    3. Standard Order
    4. Delivery Returns
SAP SD Item Categories VOV4:
  • Used to define if an item is suitable for pricing or billing.
    CategorizationDescription of an Item
    TANStandard Item
    TABIndividual Purchase Order
    TASThird Party Item
    TADService
    TANNFree of charge item
    TATXText item
    AFXInquiry item
    AGXQuotation item
Schedule lines :  VOV6
  • This graphic is explained in the accompanying text 
Copy Control : is defined as a processing which important transactions from one document to other,
  • You can also use the following T-Codes to find copy controls in a system −
    • VTAA − This control is used for copying from sales order to sales order
    • VTLA − This control is used control for copying from sales order to delivery
    • VTFL − This control is used control for copying from delivery to billing doc
    • VTFF − This control is used control for copying from billing doc to billing doc
    • VTAF − This control is used control for copying from billing doc to sales order
    • VTFA − This control is used control for copying from sales order to billing doc
  • VBUK and VBUP (field RFSTK and RFSTA )

SAP SD PRICING : VVIMP
  • used to define the calculation of prices for external vendors or customers and cost. This condition is defined as a set of conditions when a price is calculated.
SAP Pricing
Pricing in Sales and Distribution is used to define the calculation of prices for external vendors or customers and cost. This condition is defined as a set of conditions when a price is calculated.
SAP Condition Record and Table
To identify a special condition record.
A condition record specify how systems stores the specific condition.
Example of a condition record - Entering the price of a product or to specify the discount for a privileged customer.
Example of a condition Table – 005.
-          Customer
-          Material
-          Sales organization
-          Distribution Channel
S.No
Condition Type & Description
1
PR00
Price
2
K004
Material Discount
3
K005
Customer-specific material discount
4
K007
Customer discount
5
K020
Price group discount
6
KF00
Freight surcharge(by item)
7
UTX1
State tax
8
UTX2
Country tax
9
UTX3
City tax

Condition Type->Access Sequence->Condition Record->Procedure

SAP SD - Listing, Determination & Exclusion
Listing − you can create a material list for specific customers, which allows those customers to order only those materials which are maintained in the list.
Exclusion (VB01) − you can also maintain an exclusion record for specific customers and this doesn’t allow that customer to order those materials.
Order type – RE and FD and CF. (Return Delivery and Free of Charge Delivery and Consignment fill up).
Schedule line Category – VOV5 and VOV6.
Inbound Delivery – VL31N.

SAP SD – Shipping
In the shipping process, there are a few key sub processes, which include −
-          Delivery processing of the goods
-          Picking of items
-          Packing of the goods
-          Post goods issue
-          Shipping communication
-          Planning & monitoring of shipping
-          Other functions like batch determination, serial numbers, inspection, etc.

SAP SD Outbound Delivery:
  • -           SAP SD - PICKING , PACKING and PGI
    • - Picking is done via a transfer order which is used for picking list and withdraw goods from stock.
    • Three Types of picking :
      1. Picking of goods individually
      2. picking as per defined intervals
      3. Automatic picking in SAP SD
    • Packing is done with the packing material and to be created as material type 'VERP'.
    • PGI is the last step in delivery processing and in this goods ownership is moved to the customer and stock is updated as per delivery. 
      • Creating an outbound delivery - VL01N
      • Creating Picking Request - LT03
      • Create Packaging - VL02n-> Pack 
      • Creating PGI- VL02n->PGI
    • PGI Creates two documents:
      • Material Document
      • Accounting Document
Billing Documents:
  • VF01
  • VF11 - Cancel a billing doc
  • Vf05 - List all billing doc